धर्म-अध्यात्म

Mahashivratri 2026: भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के विवाद से कैसे हुई इस पर्व की शुरुआत

Sarita
14 Feb 2026 11:54 AM IST
Mahashivratri 2026: भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के विवाद से कैसे हुई इस पर्व की शुरुआत
x
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक विशेष पर्व है. यह पर्व भगवान शिव को समर्पित है. हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन महादेव की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करता है, उसके जीवन से सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं और खुशहाली आती है|
विष्णु और ब्रह्मा के बीच विवाद:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच संसार में श्रेष्ठ देवता कौन है, इसे लेकर विवाद हो गया था. ब्रह्मा जी का कहना था कि उन्होंने सृष्टि की रचना की है, इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ हैं. वहीं भगवान विष्णु का कहना था कि वे इस संसार का पालन करते हैं और ब्रह्मा जी की उत्पत्ति का आधार भी वही हैं, इसलिए वे ही सबसे श्रेष्ठ हैं. धीरे-धीरे दोनों के बीच विवाद बढ़ता गया और युद्ध में परिवर्तित हो गया, जिससे सभी देवता चिंता में पड़ गए|
भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच की शर्त:
तब भगवान शिव ने दोनों के बीच विवाद समाप्त करने के लिए अग्निपिंड या ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए. इस अग्निपिंड का न तो कोई आदि था और न ही कोई अंत. दोनों देवताओं ने आपसी सहमति से एक शर्त रखी—जो भी इस स्तंभ का अंतिम सिरा पहले ढूंढ लेगा, वही सबसे महान कहलाएगा. इसके बाद भगवान विष्णु वाराह रूप लेकर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस रूप में आकाश की ओर उड़ गए. कई युगों तक खोज करने के बाद भी भगवान विष्णु को उस अग्निपिंड का अंत नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने हार मानकर सत्य स्वीकार कर लिया|
शिव के क्रोध और काल भैरव की उत्पत्ति:
ब्रह्मा जी को भी उस अग्निपिंड की ऊंचाई का पता नहीं चला, लेकिन सत्य स्वीकार करने के बजाय उन्होंने छल का सहारा लिया. उन्होंने झूठ कहा कि उन्हें अग्निपिंड की शुरुआत का पता चल गया है. अपनी बात सिद्ध करने के लिए उन्होंने केतकी के फूल से भी झूठी गवाही दिलवाई. लेकिन महादेव से सत्य छिप नहीं सकता. ब्रह्मा जी को झूठ बोलते देखकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए और काल भैरव के रूप में प्रकट हुए. काल भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया. साथ ही, झूठी गवाही देने के कारण केतकी के फूल को पूजा में वर्जित कर दिया गया|
जब ब्रह्मा जी ने अपनी भूल स्वीकार की और क्षमा मांगी, तब भगवान विष्णु ने भी महादेव से उन्हें माफ करने का आग्रह किया. शिव जी ने क्रोध शांत होने पर कहा कि भगवान विष्णु अपनी सत्यता के कारण सदैव पूजनीय रहेंगे, लेकिन झूठ बोलने के कारण ब्रह्मा जी की सार्वजनिक पूजा नहीं होगी. यही कारण है कि आज संसार में ब्रह्मा जी के मंदिर और उनकी पूजा अत्यंत सीमित है|
महाशिवरात्रि की शुरूआत:
मान्यता है कि जिस दिन भगवान शिव इस विशाल ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे, वह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी. इसी दिन को पहली बार महाशिवरात्रि के रूप में मनाया गया. यह पर्व अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश के उदय का प्रतीक माना जाता है|
Next Story