धर्म-अध्यात्म

Mahakaleshwar Bhasma Aarti: जानिए महाकाल की भस्म आरती के समय महिलाएं घूंघट क्यों डाल लेती हैं

Sarita
16 Sept 2025 10:19 AM IST
Mahakaleshwar Bhasma Aarti: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती एक अद्भुत और अनूठी परंपरा है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। इस आरती की विशेषता यह है कि भगवान महाकाल का श्रृंगार चंदन, पुष्प या आभूषणों से नहीं, बल्कि भस्म से किया जाता है। इस आरती में पुरुष और महिलाएँ दोनों भाग ले सकते हैं, लेकिन आपने अक्सर देखा होगा कि महिलाएँ इस समय घूँघट करके दर्शन करती हैं। इसके पीछे क्या कारण है?
भस्म आरती का महत्व:
भस्म आरती भगवान शिव की सबसे प्रिय आरती मानी जाती है। इसमें महाकाल का श्रृंगार श्मशान की भस्म से किया जाता है। यह भस्म ब्रह्मांड की नश्वरता का प्रतीक है और यह दर्शाती है कि जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, जिसके बाद सब कुछ भस्म हो जाता है। इस आरती को देखने के लिए दुनिया भर से भक्त उज्जैन आते हैं।
महिलाओं द्वारा घूँघट पहनने का कारण:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म आरती के दौरान महिलाओं द्वारा घूँघट पहनने की प्रथा का मुख्य कारण भगवान शिव का निराकार रूप है।
निराकार स्वरूप का सम्मान: ऐसा माना जाता है कि भस्म आरती के दौरान भगवान शिव अपने निराकार स्वरूप में होते हैं, जिसे उनका औघड़ रूप भी कहा जाता है। इस रूप का प्रत्यक्ष दर्शन महिलाओं के लिए वर्जित माना जाता है। यह साधना शिव के सम्मान और उनके इस शक्तिशाली स्वरूप का सम्मान करने के लिए की जाती है।
सृष्टि के सार का दर्शन: भस्म श्रृंगार भगवान शिव के तपस्वी स्वरूप का प्रतीक है। यह श्रृंगार इस बात का भी प्रतीक है कि भगवान शिव ही ब्रह्मांड की रचना और विनाश दोनों के मूल में हैं। भस्म आरती के दौरान महिलाएं अपनी आँखें बंद करके या घूँघट ओढ़कर भगवान के इस स्वरूप का सम्मान करती हैं।
आध्यात्मिक अनुशासन: यह साधना केवल एक धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन भी है। यह भक्तों को सिखाती है कि भगवान को केवल भौतिक आँखों से नहीं, बल्कि भक्ति और भावना से देखा जाता है। घूँघट ओढ़ना इस बात का प्रतीक है कि महिलाएं अपने अंतर्मन से भगवान का दर्शन कर रही हैं।
परंपरा और आस्था का संगम:
महाकाल की भस्म आरती के दौरान घूँघट ओढ़ने की यह प्रथा केवल एक नियम नहीं, बल्कि आस्था का एक गहरा प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि कुछ धार्मिक अनुष्ठानों में, परंपरा का पालन ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है। यह प्रथा आज भी लाखों भक्त बिना किसी प्रश्न के करते हैं, जो उनकी अटूट आस्था और समर्पण को दर्शाता है।
Next Story