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Magh Purnima 2026: कब मनाई जाएगी माघ पूर्णिमा? जानें तिथि, डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sarita
24 Jan 2026 11:19 AM IST
Magh Purnima 2026: कब मनाई जाएगी माघ पूर्णिमा? जानें तिथि, डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
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Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में हर माह के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तिथि पड़ती है. साल में कुछ 12 पूर्णिमा की तिथियां पड़ती हैं. हर एक पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसी तरह माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघ या माघी पूर्णिमा कहा जाता है. ये पूर्णिमा अति विशेष मानी जाती है. माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है|
माघ पूर्णिमा के दिन प्रयागराज के माघ मेले में गंगा और संगम के तटों पर हर साल कल्पवासी, श्रद्धालु और साधु संत आस्था की डुबकियां लगाते हैं. माघ मेले में मााघ पूर्णिमा का स्नान एक प्रमुख स्नान होता है. मान्यता है कि इस दिन प्रयागराज के संगम में स्नान करने से भगवान विष्णु का अशीर्वाद प्राप्त होता है. मोक्ष की प्राप्ति होती है. पाप नष्ट हो जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल माघ पूर्णिमा कब है? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि|
कब है माघ पूर्णिमा:
पंचांग के अनुसार, माघ माह के शु​क्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 01 फरवरी रविवार के दिन सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 02 फरवरी को सोमवार के दिन तड़के 03 बजकर 38 मिनट पर हो जाएगा. सूर्योदय के समय पू​र्णिमा तिथि 01 फरवरी को विद्यमान रहेगी, इसलिए इस साल माघ पूर्णिमा 01 फरवरी को मनाई जाएगी|
माघ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 24 मिनट पर शुरु होगा. ये मुहूर्त 06 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. इस समय स्नान करना उत्तम रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगा ये मुहूर्त 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 05 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 06 बजकर 24 मिनट तर रहेगा|
माघ पूर्णिमा पूजा विधि:
माघ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा नदी में स्नान करें. अगर ये संभव न हो तो घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें. स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. इसके बाद पंचोपचार विधि से लक्ष्मी नारायण पूजन करें. सत्यनारयण की कथा का पाठ करें. पूजा के अंत में भगवान की आरती करें और फिर प्रसाद वितरित करें|
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