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धर्म-अध्यात्म
Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा पर पितृ दोष से मुक्ति कैसे पाएं, क्या किया गया श्राद्ध होगा सफल
Sarita
1 Feb 2026 12:20 PM IST

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Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म ग्रंथों में माघ मास की पूर्णिमा को आध्यात्मिक और पितृ कार्यो के लिए अत्यंत पवित्र तिथि माना गया है. पंचांग की गणना के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5:52 बजे प्रारंभ हुई है और 2 फरवरी को रात 3:38 बजे समापन होगा. शास्त्रों में उल्लेख है कि माघ पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से न केवल स्वयं के पापों का नाश होता है, बल्कि इस दिन किए गए विशेष उपायों से पितरों की आत्मा को शांति भी प्राप्त होती है|
माघ पूर्णिमा पर पितृ दोष और श्राद्ध का विशेष महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन स्वर्ग का द्वार खुला रहता है और सभी देवी-देवता पृथ्वी पर विचरण करते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि इस तिथि पर पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और श्राद्ध सीधे उन तक पहुंचता है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है, जिसके कारण जीवन में बाधाएं आ रही हैं, तो इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया कार्य अत्यंत सफल माना जाता है. पुराणों के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर किया गया श्राद्ध गयाजी या प्रयागराज में किए गए श्राद्ध के समान ही फलदायी होता है. इस दिन पितरों का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और वंश वृद्धि में आने वाली रुकावटें दूर होने लगती हैं|
पितृ दोष से मुक्ति के लिए प्रभावी ज्योतिषीय उपाय:
पितृ दोष से मुक्ति के लिए माघ पूर्णिमा पर कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है|
इस दिन सुबह जल्दी उठकर जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए. स्नान के पश्चात दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित (तर्पण) करें.
इस दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी और सफेद वस्त्रों का दान करना पितरों को प्रसन्न करता है.
यदि संभव हो, तो श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें या गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें. यह साधना पितरों को मोक्ष दिलाने में सहायक होती है.
इन उपायों को श्रद्धापूर्वक करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धन संपत्ति व मान-प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होने लगती है|
श्राद्ध की सफलता और दान का विशेष विधान"
कई भक्तों के मन में यह प्रश्न रहता है कि क्या पूर्णिमा पर किया गया श्राद्ध सफल होगा? शास्त्रों में इसका उत्तर मिलता है कि पूर्णिमा तिथि पूर्णता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन किया गया दान और तर्पण कभी निष्फल नहीं जाता. माघ पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को भोजन कराना और तिल का दान करना सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. इस दिन कौओं, कुत्तों और गायों को भोजन देने से पितृ तृप्त होते हैं. पूजा के दौरान मन को शांत रखें और किसी भी प्रकार के क्रोध या नकारात्मक विचारों से बचें. मान्यता है कि जब व्यक्ति शुद्ध मन से दान करता है, तो उसके पिता की संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ जाते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद कवच की तरह रक्षा करता है|
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