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धर्म-अध्यात्म
Magh Mela 2026: माघ स्नान,मकर संक्रांति से मौनी अमावस्या तक क्यों खास हैं ये पावन तिथियां
Sarita
7 Jan 2026 8:38 AM IST

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Magh Mela 2026:सनातन धर्म में माघ मास को बहुत ही पुण्यदायी माना गया है. खासतौर पर प्रयागराज में लगने वाला माघ मेला आस्था, तप, दान और स्नान का संगम होता है. शास्त्रों के अनुसार माघ महीने में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में किया गया स्नान मोक्षदायी फल देता है. साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा. इस दौरान कई ऐसी पावन तिथियां आती हैं, जिन पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति से मौनी अमावस्या सहित माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियों और उनके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से|
माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां:
3 जनवरी 2026 पौष पूर्णिमा
15 जनवरी 2026 मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी
1 फरवरी 2026 माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 महाशिवरात्रि
पौष पूर्णिमा (3 जनवरी 2026): माघ स्नान की पावन शुरुआत:
पौष पूर्णिमा से ही माघ स्नान का विधिवत आरंभ माना जाता है. इस दिन से कल्पवासी संगम तट पर निवास कर नियमित स्नान, जप और दान करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर स्नान करने से पिछले जन्मों के पापों का क्षय होता है और व्यक्ति को धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है|
मकर संक्रांति (15 जनवरी 2026): सूर्य के उत्तरायण का महापर्व:
मकर संक्रांति का दिन माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे सूर्य उत्तरायण होते हैं. शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर संगम स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. तिल, गुड़ और दान का भी विशेष महत्व होता है|
मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026): सबसे पवित्र स्नान तिथि:
मौनी अमावस्या को माघ मेले की सबसे महत्वपूर्ण और भीड़भाड़ वाली तिथि माना जाता है. इस दिन मौन रहकर स्नान, ध्यान और तप करने की परंपरा है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किया गया संगम स्नान राजसूय यज्ञ के समान फल देता है और व्यक्ति के समस्त पापों का नाश करता है|
बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026): ज्ञान और पवित्रता का पर्व:
बसंत पंचमी को देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. यह तिथि माघ स्नान के लिए भी विशेष मानी जाती है. इस दिन पीले वस्त्र धारण कर संगम में स्नान करने से विद्या, बुद्धि और वाणी में शुद्धता आती है. साधु-संतों के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ है|
माघी पूर्णिमा (1 फरवरी 2026): कल्पवास का समापन:
माघी पूर्णिमा को कल्पवास समाप्त होता है. एक महीने तक संयम, तप और नियम का पालन करने वाले श्रद्धालु इस दिन अंतिम स्नान करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि माघी पूर्णिमा का स्नान करने से जीवन के समस्त कष्ट समाप्त होते हैं और मनुष्य को वैकुंठ की प्राप्ति होती है|
महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026): माघ मेले का दिव्य समापन:
महाशिवरात्रि के दिन माघ मेले का समापन होता है. यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन संगम स्नान के बाद शिव पूजा और रुद्राभिषेक करने से साधक को शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शांति व संतुलन आता है|
क्यों खास है माघ स्नान?
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है माघे स्नानं महापुण्यं, अर्थात माघ मास में किया गया स्नान सबसे बड़ा पुण्य है. माघ स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र करता है. यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु माघ मेले में पहुंचते हैं|
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