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धर्म-अध्यात्म
Laxmi Jayanti 2026: इस दिन मनाई जाएगी लक्ष्मी जयंती, करें ये आसान उपाय, धन की देवी बरसाएंगी कृपा
Sarita
28 Feb 2026 10:58 AM IST

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Laxmi Jayanti 2026: हिंदू धर्म में धन, वैभव और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जिस घर पर महालक्ष्मी की शुभ दृष्टि होती है, वहां सुख-शांति और संपन्नता का वास होता है. वैसे तो लोग मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन विशेष पूजा-अर्चना और उपाय करते हैं, लेकिन फाल्गुन मास की लक्ष्मी जयंती पर किए कुछ उपाय अत्यंत मंगलकारी और भाग्यवर्धक साबित होते हैं. हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च से शुरू हो रही है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. ऐसे में आइए जानते हैं कि लक्ष्मी जयंती के लिए शुभ मुहूर्त क्या है, इस दिन क्या करने से मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त हो सकती है|
लक्ष्मी जयंती 2026 शुभ मुहूर्त:
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी. जबकि, इस तिथि की समाप्ति 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 07 मिनट पर होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल लक्ष्मी जयंती 3 मार्च को मनाई जाएगी|
लक्ष्मी जयंती क्या है पौराणिक महत्व:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी जयंती वह पावन तिथि है जब देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. कथाओं के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर ही 'समुद्र मंथन' के दौरान मां लक्ष्मी क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं. यही वजह है कि इस दिन को उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन की गई विशेष पूजा-अर्चना से दरिद्रता का नाश होता है और आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता|
लक्ष्मी जयंती 2026 पर क्या करना है शुभ:
लक्ष्मी जयंती के अवसर पर भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कई श्रद्धालु इस दिन अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में 'लक्ष्मी हवन' का आयोजन करते हैं. हवन के दौरान देवी लक्ष्मी के 'सहस्रनामावली' (हजार नाम) और 'श्री सूक्तम्' का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है.महालक्ष्मी को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है. ऐसे में विशेष फल प्राप्ति के लिए शहद में डूबे हुए कमल के पुष्पों की आहुति देते हैं. मान्यता है कि इस अनुष्ठान से कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं.
महालक्ष्मी मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नमः
कुबेर अष्टलक्ष्मी मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः
लक्ष्मी गायत्री मंत्र - ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि, तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्
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