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Krishna Janmashtami 2025: कब है जन्माष्टमी,जानिए तिथि, पूजा विधि और इसका महत्व

Sarita
8 July 2025 10:56 AM IST
Krishna Janmashtami 2025: कब है जन्माष्टमी,जानिए  तिथि, पूजा विधि और इसका महत्व
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Krishna Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और उनकी लीलाओं का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मथुरा और वृंदावन में यह पर्व विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि 2025 में जन्माष्टमी कब है, पूजा करने की सही विधि क्या है और इस त्योहार का क्या महत्व है|
कब है जन्माष्टमी 2025:
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। जन्माष्टमी की पूजा का सबसे शुभ समय निशिता काल में होता है, जो मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के समय को दर्शाता है।
जन्माष्टमी की पूजा विशेष रूप से मध्यरात्रि में की जाती है, जिसे निशिता पूजा कहा जाता है।
निशिता पूजा का समय: 16 अगस्त 2025 को 12:04 AM से 12:47 AM तक (कुल 43 मिनट की अवधि)
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025 को 11:49 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025 को 09:34 PM बजे
दही हांडी: 16 अगस्त 2025 (शनिवार)
जन्माष्टमी पूजा विधि:
जन्माष्टमी की पूजा विधि भक्ति और श्रद्धा से भरी होती है। सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार (फल, दूध, पानी) ग्रहण करें और सात्विक रहें। रात में पूजा की तैयारी करें। सबसे पहले एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर लड्डू गोपाल (श्रीकृष्ण की बाल मूर्ति) को स्थापित करें। मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) से स्नान कराएं, फिर गंगाजल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें। इसके बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र, मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से सजाएं।
जन्माष्टमी का पर्व धर्म की अधर्म पर जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान कृष्ण ने धरती पर धर्म की स्थापना और अधर्मियों का नाश करने के लिए अवतार लिया था। इस दिन व्रत रखने और भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि, लंबी आयु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व हमें भगवान कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का अवसर देता है, जो हमें कर्म, प्रेम और भक्ति का मार्ग सिखाती हैं।
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