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धर्म-अध्यात्म
Krishna Janmashtami 2025: जानिए भगवान कृष्ण के मुकुट पर मोर पंख की सजावट - आध्यात्मिक रहस्य
Sarita
16 Aug 2025 7:08 AM IST

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Krishna Janmashtami 2025: भगवान कृष्ण के मुकुट पर सुशोभित मोर पंख केवल उनकी सुंदरता का आभूषण नहीं है, बल्कि गहन पौराणिक कथाओं, आध्यात्मिक अर्थों और शास्त्रीय मान्यताओं से जुड़ा एक प्रतीक है। भक्ति जगत में मान्यता है कि कान्हा के बिना बांसुरी अधूरी है, और बांसुरी के बिना मोर पंख अधूरा है। लेकिन यह परंपरा कैसे शुरू हुई? इसके पीछे तीन अद्भुत कथाएँ हैं, साथ ही धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आध्यात्मिक रहस्य भी हैं।
पहली कथा है राहु दोष और माँ का उपाय:
कहते हैं कि जब नन्हे कृष्ण का जन्म हुआ, तो कुछ दिनों बाद माता यशोदा ने एक ज्योतिषी को उनकी कुंडली दिखाई। ज्योतिषी ने बताया कि कान्हा को राहु दोष है। माता के प्रेम में डूबी यशोदा ने तुरंत उपाय पूछा, तो उत्तर मिला - "यदि मोर पंख सदैव उनके पास रहे, तो यह दोष शांत हो जाएगा।" माता यशोदा ने एक दिन कान्हा के मुकुट को मोर पंख से सुसज्जित कर दिया। कान्हा उसमें इतने सुंदर लग रहे थे कि यशोदा ने निश्चय कर लिया - अब मोर पंख सदैव उनके मुकुट में रहेगा।
दूसरी कथा: श्रृंगार में मोर पंख की छवि:
एक अन्य कथा में वर्णित है कि माता यशोदा प्रतिदिन कान्हा को अलग-अलग श्रृंगार से सजाती थीं। एक दिन उन्होंने उन्हें मोर पंखों से सुसज्जित किया। कान्हा की मनमोहक छवि देखकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। उस दिन से मोर पंख उनके मुकुट का स्थायी अंग बन गए।
तीसरी कथा: मोरों का उपहार:
एक अन्य प्रसंग में बताया जाता है कि एक बार बाल कृष्ण वन में बांसुरी बजा रहे थे। उनकी मधुर धुन सुनकर मोरों का एक झुंड नाचने लगा। नृत्य समाप्त होने के बाद, मोरों के सेनापति ने कान्हा के चरणों में सबसे सुंदर पंख अर्पित किया। कृष्ण ने उसे प्रेमपूर्वक स्वीकार किया और अपने मस्तक पर धारण किया।
हिंदू धर्म में मोर पंख को सौभाग्य, शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित है कि मोर के पंखों पर ब्रह्मांड के सभी रंग, नीला, हरा, सुनहरा, निवास करते हैं, जो ब्रह्मांड के संतुलन को दर्शाते हैं। वहीं, भागवत पुराण में कृष्ण के श्रृंगार में मोर पंख का वर्णन उनकी लीलाओं की मधुरता और प्रकृति के साथ उनके अटूट रिश्ते का प्रतीक माना गया है। मोर पंख को "तमस" यानी नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला भी कहा गया है। इसे घर में रखने से राहु-केतु जैसे ग्रह दोष शांत होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
आज भी मोर पंख के बिना भक्ति अधूरी मानी जाती है:
इन कथाओं और आध्यात्मिक महत्व के कारण, आज भी भगवान कृष्ण की भक्ति मोर पंख के बिना अधूरी मानी जाती है। भक्तों का मानना है कि मोर पंख केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि भगवान की लीलाओं, प्रेम और रक्षा का प्रतीक है। यही कारण है कि जन्माष्टमी से लेकर दैनिक पूजा-पाठ तक, मोर पंख कान्हा की पहचान का अभिन्न अंग हैं।
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