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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। ज्योतिष शास्त्र का पालन सदियों से किया जाता रहा है, जिसमें ग्रह नक्षत्रों की गणना के आधार पर जातक को शुभ-अशुभ फल देने वाले योगों की जानकारी मिलती है. वैदिक ज्योतिष में कई ऐसे योग हैं, जिससे मनुष्य हर मुकाम हासिल करता है. वहीं, कुछ योग ऐसे हैं, जो जातक के लिए हमेशा परेशानी खड़ी कर देते हैं. हमारे द्वारा चलाई जा रही सीरीज में अभी तक हमने गजकेसरी योग, रुचक योग के बारे में भोपाल के रहने वाले ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से जाना. आज की इस कड़ी में पंडित जी हमें बता रहे हैं हंस योग के विषय में. आइए जानते हैं हंस योग कैसे बनता है और इसके क्या फायदे हैं.
कैसे बनता है हंस योग
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति लग्न या चन्द्रमा से पहले, चौथे, सातवें और दशवें भाव में कर्क, धनु अथवा मीन राशि में होता है, तब हंस योग बनता है. जिस तरह बुध के साथ अन्य ग्रहों के मिलने से भद्र योग बनता है. वैसे ही कुंडली में बृहस्पति के साथ अन्य ग्रहों के मजबूत स्तिथि में होने से हंस योग बनता है. बृहस्पति ग्रह को शिक्षा और ज्ञान का करक ग्रह माना जाता है. वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को बहुत शुभ गृह की संज्ञा दी गई है. ऐसा माना जाता है कि बृहस्पति से बनने वाले योग बहुत शुभ होते हैं और ये जातक को सभी प्रकार से फलीभूत होते है.
हंस योग में जन्मे व्यक्ति
1. हंस योग में जन्मा व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान के मामले में अन्य लोगों से आगे रहता है. इस योग में जन्मे लोग अपने से बड़ों का आदर-सम्मान करते हैं. शिक्षा के प्रति गंभीर होते है और इनकी ज्ञान प्राप्त करने की लालसा कभी समाप्त नहीं होती.
2. इस योग में जन्मे व्यक्ति सुन्दर, सुशील, आकर्षण का केंद्र होते हैं. इनकी दूसरों से बात करने की शैली लाजवाब होती है, जिससे यह लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं. इनको सदैव अपने घर परिवार का साथ मिलता है.
3. इस योग में जन्मे व्यक्ति अपने कुल का नाम रोशन करते हैं. हंस योग निर्माण से व्यक्ति किसी धार्मिक या आध्यात्मिक संस्था में किसी प्रतिष्ठा और स्वामित्व वाले पद को प्राप्त कर सकता है.
4. इस योग में जन्मे व्यक्ति अपने द्वारा किए गए कार्यों से धन कमाते हैं. इनका रुझान धार्मिक और सामाजिक कार्यों की तरफ होता है.
5. हंस योग में जन्मे व्यक्ति खाने के शौकीन होते हैं और ये सदैव अपने मन की बात मानते हैं. इनमें थोड़ा अहंकार होता है और सदैव सफल होना चाहते हैं.
हंस योग का कुंडली में प्रभाव
हंस योग में जन्मे जातक समाज में यश और कीर्ति प्राप्त करते है. ये अन्य लोगों के बीच लोकप्रिय होते हैं. इनकी निर्णय लेने की क्षमता बहुत अच्छी होती है. बृहस्पति गृह के कारण बनने वाले इस योग से वैवाहिक जीवन में ख़ुशी मिलती. बच्चों और भाई-बहनों के साथ सामंजस्य बना रहता है.
कब फलदायी नहीं होता हंस योग
1. यदि किसी जातक की कुंडली में अशुभ गुरु के कई भावों और कई राशियों में स्थित होते हैं तो इससे कई प्रकार के दोष बनते हैं.
2. जिस जातक की कुंडली में अशुभ गुरु के दसवें घर में कर्क, धनु या फिर मीन राशि होती है, ऐसी स्थिति में हंस योग फलदायी नहीं होता.
3. वहीं, यदि किसी की कुंडली में शुभ गुरु पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होता है तो भी हंस योग का फल प्राप्त नहीं होता.
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