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Khatu Shyam Mela 2026: जानें 27 फरवरी को क्यों उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़,जानें बाबा के बारे में ये बातें

Sarita
24 Feb 2026 12:38 PM IST
Khatu Shyam Mela 2026: जानें  27 फरवरी को क्यों उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़,जानें बाबा के बारे में ये बातें
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Khatu Shyam Mela 2026: अगर आप भी बड़ी मुश्किल से बाबा श्याम के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो राजस्थान के सीकर जिले में दुनिया भर में मशहूर खाटू धाम में सालाना फाल्गुन लक्खी मेला 2026, 21 फरवरी से शुरू हो गया है और 28 फरवरी तक धूमधाम से चलेगा। इस मेले का सबसे खास दिन 27 फरवरी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यही वजह है कि इस दिन देश-विदेश से लाखों भक्त खाटू पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में आस्था की लहर दौड़ जाती है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व और बाबा श्याम से जुड़ी उन बातों के बारे में जो उन्हें कलियुग का अवतार बनाती हैं।
कौन हैं बाबा खाटू श्याम?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम को भगवान कृष्ण का कलियुगी अवतार माना जाता है। कहानियों के अनुसार, वे महाभारत के वीर योद्धा भीम के पोते बर्बरीक थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलियुग में उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा और जो कोई भी उन्हें सच्चे दिल से पुकारेगा, उसकी मनोकामना पूरी होगी। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से खाटू श्याम बाबा की पूजा करता है, उसकी मनोकामना ज़रूर पूरी होती है।
27 फरवरी क्यों खास है?
फाल्गुन शुक्ल एकादशी को बाबा श्याम का जन्मदिन माना जाता है। इस दिन मंदिर में खास पूजा, भजन, कीर्तन और एक बड़ी शोभायात्रा निकाली जाती है। भक्त बाबा को भगवा झंडा, चूरमा और फूलों की चादर चढ़ाते हैं। इस मौके पर खाटू शहर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और रात भर भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।
बाबा खाटू श्याम के बारे में 10 खास बातें:
बर्बरीक का सिर: खाटू में बाबा के सिर की पूजा की जाती है, जिसे महाभारत युद्ध के बाद यहां स्थापित किया गया था।
हारे हुए का सहारा: बाबा श्याम को हारे हुए का सहारा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो कोई भी जीवन से निराश होता है, बाबा उसे सहारा देते हैं।
बर्बरीक भीम के पोते थे: महाभारत के अनुसार, बर्बरीक पांडवों में से एक भीम और उनकी पत्नी हिडिम्बा के बेटे घटोत्कच के बेटे थे।
तीन तीर वाले: बर्बरीक को तीन तीरों का वरदान मिला था, जिससे वह एक पल में पूरी सेना को हरा सकता था।
कृष्ण का वरदान: भगवान कृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।
लक्खी मेले की परंपरा: फाल्गुन महीने में लगने वाला लक्खी मेला देश के बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।
खाटू धाम कहाँ है? प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, जहां हर साल लाखों भक्त आते हैं।
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