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धर्म-अध्यात्म
जन्माष्टमी व्रत में रखें खानपान का ध्यान ये चीजें हैं शुभ
Ratna Netam
3 Sept 2026 4:00 PM IST

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धर्म : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है और भक्त श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं। जन्माष्टमी के उपवास में केवल भूखा रहना ही नहीं बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त अपनी परंपरा और क्षमता के अनुसार निर्जला व्रत, फलाहार व्रत या सात्विक भोजन वाला उपवास रखते हैं।
जन्माष्टमी 2026 में व्रत को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि उपवास के दौरान क्या खाएं और किन चीजों से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सात्विक और व्रत के अनुकूल भोजन करना चाहिए।
जन्माष्टमी व्रत में क्या खा सकते हैं
1. फल और फलों का रस
जन्माष्टमी व्रत में फलाहार का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त केला, सेब, अंगूर, अनार, पपीता और अन्य मौसमी फलों का सेवन कर सकते हैं।
फल शरीर को ऊर्जा देते हैं और लंबे समय तक व्रत रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा नारियल पानी और फलों का ताजा रस भी लिया जा सकता है।
2. दूध और दूध से बनी चीजें
भगवान श्रीकृष्ण को दूध, दही, माखन और मिश्री बेहद प्रिय माने जाते हैं। इसलिए जन्माष्टमी के व्रत में दूध और दूध से बनी चीजों का विशेष महत्व होता है।
भक्त दूध, दही, पनीर, मखाने की खीर और पंचामृत का सेवन कर सकते हैं। पूजा में भी माखन-मिश्री और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है।
3. साबूदाना से बने व्यंजन
व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा और साबूदाना खीर जैसे व्यंजन खाए जाते हैं।
साबूदाना शरीर को ऊर्जा देने वाला माना जाता है और उपवास में इसे आसानी से पचने वाला भोजन माना जाता है।
4. कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
जन्माष्टमी व्रत में गेहूं और सामान्य अनाज से परहेज किया जाता है। इसकी जगह कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खाई जाती हैं।
कुट्टू की पूरी, रोटी या पकौड़ी व्रत रखने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है।
5. मखाना और सूखे मेवे
मखाना, बादाम, काजू, अखरोट और किशमिश जैसे सूखे मेवे व्रत में खाए जा सकते हैं।
मखाने से बनी खीर भी भगवान कृष्ण को भोग के रूप में अर्पित की जाती है और इसे व्रत के दौरान भी ग्रहण किया जाता है।
6. सेंधा नमक का इस्तेमाल
व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करने की परंपरा है। आलू, शकरकंद, अरबी जैसी सब्जियों में सेंधा नमक डालकर सेवन किया जाता है।
जन्माष्टमी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
1. अनाज से बनी चीजें
जन्माष्टमी व्रत में गेहूं, चावल, दाल और अन्य अनाज का सेवन नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान इन चीजों से दूरी रखी जाती है।
इसलिए रोटी, चावल, दाल, सामान्य आटे की पूरी और अन्य अनाज वाली चीजों से बचना चाहिए।
2. प्याज और लहसुन
जन्माष्टमी के व्रत में सात्विक भोजन का नियम माना जाता है। इसलिए प्याज और लहसुन से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता।
भक्त इस दिन साधारण और शुद्ध भोजन को प्राथमिकता देते हैं।
3. मांसाहार और शराब
जन्माष्टमी जैसे धार्मिक पर्व पर मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने और भगवान कृष्ण की भक्ति में ध्यान लगाने पर जोर दिया जाता है।
4. ज्यादा तला और मसालेदार भोजन
व्रत के बाद कई लोग ज्यादा तला हुआ भोजन कर लेते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए हल्का और सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है।
जन्माष्टमी व्रत में भगवान कृष्ण को लगाएं ये भोग
भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, पंचामृत, खीर, धनिया पंजीरी, फल और दूध से बनी मिठाइयां प्रिय मानी जाती हैं।
कई भक्त जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा करते हैं और इसके बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
व्रत खोलने यानी पारण का नियम
जन्माष्टमी व्रत खोलने का समय अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकता है। कई भक्त भगवान कृष्ण के जन्म के बाद मध्यरात्रि पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं।
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान
धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए।
निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं होता, इसलिए अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार फलाहार या हल्का सात्विक व्रत रखा जा सकता है।
जन्माष्टमी का व्रत केवल भोजन से जुड़ा नियम नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व है। सही नियमों के साथ व्रत रखने से भक्त आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
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