धर्म-अध्यात्म

Kartik Purnima Snan 2025: कार्तिक पूर्णिमा को कौन-से तीर्थों पर करें स्नान? जहां भक्त को मिलता है विशेष पुण्य

Sarita
4 Nov 2025 12:41 PM IST
Kartik Purnima Snan 2025: कार्तिक पूर्णिमा को कौन-से तीर्थों पर करें स्नान? जहां भक्त को मिलता है विशेष पुण्य
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Kartik Purnima Snan 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की पूर्णिमा इस वर्ष 4 नवंबर को रात्रि 10:36 बजे से प्रारंभ होकर 5 नवंबर 2025 को शाम 6:48 बजे तक रहेगी। यह दिन अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा, यमुना या किसी भी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने से अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होकर गंगा में स्नान करते हैं, इसलिए इस दिन स्नान और दान करना सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फलदायी होता है।
काशी - मोक्ष की नगरी:
काशी नगरी कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए सर्वश्रेष्ठ तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाती है। इस दिन गंगा तट पर दीपदान और स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि यहीं देव दीपावली का मुख्य पर्व मनाया जाता है, जब पूरा गंगा तट दीपों से जगमगा उठता है। इस दिन काशी में स्नान और दीपदान करने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में शुभ फलों की वृद्धि होती है।
प्रयागराज - त्रिवेणी संगम का महापुण्य:
प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन यहाँ स्नान करने से जन्म-जन्मान्तरों के पाप धुल जाते हैं और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। हजारों श्रद्धालु ब्रह्ममुहूर्त में संगम में स्नान करते हैं, दीपदान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। यह स्थान मोक्ष और दिव्यता का द्वार माना जाता है, जहाँ देवता भी माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।
हरिद्वार - माँ गंगा का दिव्य स्पर्श:
कार्तिक पूर्णिमा को हरिद्वार में गंगा स्नान और दीपदान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हर की पौड़ी पर स्नान करने से मन, तन और आत्मा की शुद्धि होती है। गंगा आरती में भाग लेकर भक्त जीवन के सभी दुखों और पापों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। माँ गंगा का दिव्य स्पर्श जीवन में सौभाग्य, शांति और समृद्धि का प्रवाह शुरू करता है।
पुष्कर - ब्रह्म सरोवर का पुण्य:
कार्तिक पूर्णिमा पर राजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्म सरोवर में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। किंवदंती है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा स्वयं यहाँ प्रकट होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन सरोवर में स्नान करने, दीप जलाने और भगवान ब्रह्मा की पूजा करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। लाखों भक्त यहाँ स्नान करते हैं, आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं और भगवान ब्रह्मा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नासिक और उज्जैन - दिव्य ध्यान के केंद्र:
महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी और मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का अत्यधिक महत्व है। नासिक में गोदावरी नदी में स्नान करने से धन, यश और ज्ञान की प्राप्ति होती है, जबकि उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर के दर्शन और पूजन से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। इन पवित्र स्थलों पर स्नान करने से भक्त को आध्यात्मिक प्रगति, मानसिक शांति और दिव्य ऊर्जा प्राप्त होती है।
घर पर ही पवित्र स्नान करें:
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ स्थलों या नदियों में नहीं जा पाते, वे घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करके समान पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सच्ची भक्ति स्थान से नहीं, बल्कि भावना से मापी जाती है। यदि व्यक्ति मन, वचन और कर्म से शुद्ध भक्ति और आस्था रखता है, तो घर पर गंगाजल से स्नान करना पवित्र जल से स्नान करने के समान ही फलदायी होता है। इसे आध्यात्मिक शुद्धि, पापों से मुक्ति और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक माना जाता है।
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