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Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा पर जानें चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने का समय

Sarita
4 Nov 2025 12:58 PM IST
Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा पर जानें चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने का समय
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Kartik Purnima 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन अत्यंत शुभ और धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और अपार पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत, दान और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा का व्रत, स्नान और दान बुधवार, 5 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 कब है?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को रात्रि 10:36 बजे प्रारंभ होकर 5 नवंबर को शाम 6:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि 5 नवंबर को होने के कारण, इस दिन कार्तिक पूर्णिमा का व्रत, दान और पूजा करना अत्यंत शुभ रहेगा। सुबह जल्दी उठकर स्नान और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का महत्व और शुभ मुहूर्त:
हिंदू परंपरा में, कार्तिक पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे पवित्र माना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:44 बजे तक:
इस दौरान गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र तीर्थस्थल पर स्नान करने से मन और तन दोनों शुद्ध होते हैं। ऐसा करने से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 6:36 से 7:58 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 7:58 से 9:20 बजे तक
इन मुहूर्तों में तिल, वस्त्र, दीप, अनाज या धन का दान करने से अत्यधिक लाभ होता है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त:
इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन-धान्य और समृद्धि आती है। प्रदोष काल, यानी शाम का समय, पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:33 बजे के बाद:
इस समय दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
कार्तिक पूर्णिमा 2025 चंद्र दर्शन और अर्घ्य समय
इस दिन चंद्रमा की पूजा और उन्हें अर्घ्य देना बहुत शुभ माना जाता है।
चंद्रोदय समय: शाम 5:11 बजे:
व्रत रखने वाले इस समय भगवान चंद्र को अर्घ्य देते हैं और अपने परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर जीवन की रक्षा के लिए इसी दिन मत्स्यावतार धारण किया था। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कई लोग इस अवसर पर सत्यनारायण कथा का आयोजन करते हैं, जिससे उनके घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व आस्था, दान और पवित्रता का प्रतीक है। इसलिए 5 नवंबर की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, दान और पूजा-पाठ करें - क्योंकि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल सौ गुना बढ़ जाता है।
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