धर्म-अध्यात्म

Kartik Month 2025: कार्तिक माह शुरू, इन गलतियों से बचें, वरना घर में छा जाएगी दरिद्रता

Sarita
9 Oct 2025 6:42 AM IST
Kartik Month 2025: कार्तिक माह शुरू, इन गलतियों से बचें, वरना घर में छा जाएगी दरिद्रता
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Kartik Month 2025 :पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास 2025 में 8 अक्टूबर से शुरू होकर 5 नवंबर 2025 तक रहेगा। हिंदू धर्म में कार्तिक मास को सबसे पवित्र और पुण्य मास माना जाता है। इस पूरे माह भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, तुलसी और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस माह में स्नान, दान, व्रत और पूजा-अर्चना करने से अक्षय फल प्राप्त होते हैं।
हालाँकि, शास्त्रों में कहा गया है कि इस पवित्र माह में की गई गलतियों के प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं। ये गलतियाँ व्यक्ति के सुख-समृद्धि को छीन सकती हैं और दरिद्रता का कारण बन सकती हैं। आइए जानें कि कार्तिक माह में किन कार्यों से बचना चाहिए।
कार्तिक माह में न करें ये काम!
तामसिक भोजन:
कार्तिक माह में मांस, मछली, अंडे, शराब और धूम्रपान का सेवन सख्त वर्जित है। यह महीना सात्विक जीवन जीने और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का है। इसके अलावा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से भी बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि तामसिक भोजन करने से मन और तन की पवित्रता भंग होती है और पूजा-पाठ में हानि होती है।
शरीर पर तेल लगाना:
मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में पूरे शरीर पर तेल लगाने से बचना चाहिए। हालाँकि, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) को शरीर पर तेल लगाना शुभ माना जाता है। इसलिए, इस एक दिन को छोड़कर पूरे महीने तेल लगाने से बचें।
बाल और नाखून कटवाना:
कार्तिक मास को संयम का महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र माह में बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। ऐसा करने से पूजा-पाठ का फल नष्ट हो जाता है और शुभता कम हो जाती है।
भूमि पर शयन और दोपहर में शयन:
इस माह में बिस्तर पर सोने के बजाय भूमि शयन करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, दोपहर में सोना भी अशुभ माना जाता है। इस महीने में ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करने और यथासंभव प्रार्थना, जप और ध्यान में समय बिताने पर ज़ोर दिया जाता है।
कार्तिक मास में अपशब्दों का प्रयोग, झगड़ा, क्रोध और दूसरों की आलोचना से बचना चाहिए। मन को शांत और पवित्र बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान दान और स्त्रियों तथा गुरुओं का सम्मान अत्यंत शुभ माना जाता है।
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