धर्म-अध्यात्म

Kamika Ekadashi 2025: सावन में कामिका एकादशी कब है, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

Sarita
11 July 2025 9:35 AM IST
Kamika Ekadashi 2025:  सावन में कामिका एकादशी कब है, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि
x
Kamika Ekadashi 2025: 11 जुलाई 2025 से सावन शुरू हो रहा है। यह महादेव का प्रिय महीना है, जिसमें भव्य आयोजन के साथ शिव पूजन किया जाता है। मान्यता है कि सावन में प्रभु की उपासना करने से साधक के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। यही नहीं इस अवधि में आने वाले तीज-त्योहारों पर भी भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहती है। चूंकि इस दौरान चातुर्मास होता है, इसलिए सृष्टि का संचालन भी शिव जी करते हैं। ऐसे में एकादशी पर उनकी भी उपासना करना बेहद शुभ होता है।
बता दें, सावन माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर कामिका एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना का विधान है। इसके प्रभाव से साधक को मोक्ष की प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि मिलती हैं। अब सवाल यह है कि सावन में यह व्रत कब रखा जाएगा ? तो आइए विस्तार से जानते हैं।
कब है कामिका एकादशी:
पंचांग के अनुसार सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 20 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 21 जुलाई दिन सोमवार को सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 21 जुलाई 2025 को कामिका एकादशी का व्रत किया जाएगा। यह सावन महीने की प्रथम एकादशी भी होगी।
कामिका एकादशी की पूजा विधि:
एकादशी के दिन सुबह ही स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा के लिए सर्वप्रथम एक साफ चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
अब प्रभु को प्रणाम करते हुए पीले फूल, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य आदि से पूजा करें।
इस दौरान तुलसी पत्र का विशेष महत्व है, इसलिए पूजा में इसे शामिल करें।
प्रभु के मंत्रों का उच्चारण करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें केसर या मखाने की खीर का भोग लगाएं।
अब शाम के समय एक बार फिर भगवान विष्णु की आरती करें और फलाहार ग्रहण करें।
रात में भजन-कीर्तन करते हुए अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण कर लें।
Sawan 2025: श्रावण माह 11 जुलाई से प्रारंभ, जानिए इस महीने क्यों होती है शिव पूजा फलदायी ?
भगवान विष्णु के खास मंत्र
भगवान विष्णु का बीज मंत्र
ॐ बृं
भगवान विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:
भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र:
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भगवान विष्णु की आरती:
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
Next Story