धर्म-अध्यात्म

Kamada Ekadashi 2026: 29 मार्च को तुलसी पूजन और विष्णु-लक्ष्मी पूजा का महत्व

Gulabi Jagat
22 March 2026 5:26 PM IST
Kamada Ekadashi 2026: 29 मार्च को तुलसी पूजन और विष्णु-लक्ष्मी पूजा का महत्व
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वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की कामदा एकादशी 29 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की साधना से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

तुलसी पूजन का महत्व:

कामदा एकादशी के अवसर पर तुलसी का पूजन करने का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि तुलसी पूजन से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और अन्न-धन की समृद्धि बनी रहती है। इस दिन पूजा के दौरान तुलसी चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन लाभ और सफलता के मार्ग खुलते हैं।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, कामदा एकादशी पर किए गए व्रत और पूजा से जीवन में आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि दोनों प्राप्त होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और तुलसी की आराधना से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को पवित्र और पुण्यदायक माना गया है। कामदा एकादशी विशेष रूप से धन-संपत्ति और समृद्धि से जुड़ी हुई मानी जाती है। इस दिन उपवास और पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में समृद्धि, सुख और सफलता के अवसर बढ़ते हैं।

सारांश में:

तारीख: 29 मार्च 2026

महत्वपूर्ण पूजन: भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और तुलसी पूजन

पाठ: तुलसी चालीसा

लाभ: धन-संपत्ति, सुख-शांति, सफलता

इस प्रकार, कामदा एकादशी का व्रत और तुलसी पूजन जीवन में समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा सुनिश्चित करने का शुभ अवसर प्रदान करता है।

।।तुलसी चालीसा।।
श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।
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