धर्म-अध्यात्म

Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन तीन शुभ योगों का महासंगम, एक पूजा से पूरी होगी हर मनोकामना

Sarita
11 Sept 2025 11:42 AM IST
Kalashtami 2025: कालाष्टमी के दिन तीन शुभ योगों का महासंगम, एक पूजा से पूरी होगी हर मनोकामना
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Kalashtami 2025 : इस बार कालाष्टमी बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन तीन शुभ योगों का एक दुर्लभ महासंयोग बनने जा रहा है। सिद्धि योग, रवि योग और शिववास योग। इन दुर्लभ योगों के कारण इस दिन की गई भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होगी। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी हो सकती है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी व्रत का शुभ मुहूर्त और तिथि:
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर 2025 को प्रातः 05:04 बजे प्रारंभ होगी और 15 सितंबर को देर रात 03:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत और पूजा 14 सितंबर को करना श्रेष्ठ रहेगा।
कालाष्टमी पर तीन दुर्लभ योग बन रहे हैं:
सिद्धि योग: यह योग कार्यों में सफलता और सिद्धि दिलाने वाला माना जाता है। इस योग में किए गए सभी धार्मिक कार्य और अनुष्ठान सफल होते हैं।
रवि योग: सूर्य देव से संबंधित यह योग अत्यंत प्रभावशाली होता है। इस योग में की गई पूजा और उपाय व्यक्ति को रोगों से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय दिलाते हैं।
शिववास योग: यह योग तब बनता है जब भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते हैं। इस योग में की गई पूजा और अभिषेक सीधे शिव तक पहुँचता है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं।
इन तीनों योगों के एक साथ होने से कालाष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन की गई पूजा से न केवल भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं, बल्कि शिव और सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
कालाष्टमी पूजा विधि और मंत्र:
कालाष्टमी के दिन व्रत रखने के साथ-साथ भगवान काल भैरव की विशेष पूजा करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उनका गंगाजल से अभिषेक करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। उन्हें काले तिल, उड़द की दाल, गुड़ और रोटी का भोग लगाएँ। पूजा के बाद काल भैरव चालीसा और भैरव अष्टक का पाठ करें। शाम के समय कुत्तों को भोजन कराएँ, क्योंकि उन्हें भगवान भैरव का वाहन माना जाता है।
काल भैरव को काल का देवता और मृत्यु का दण्ड देने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु, भय और शत्रु बाधाओं से मुक्त हो जाता है। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन पूजा करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। व्यापार, नौकरी और धन संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं।
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