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Kalashtami 2025: जानें कब है कालाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

Sarita
13 Aug 2025 12:37 PM IST
Kalashtami 2025: जानें  कब है कालाष्टमी  पूजा का शुभ मुहूर्त
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Kalashtami 2025: हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पंचांग के अनुसार, आइए जानते हैं अगस्त 2025 में कालाष्टमी कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका क्या महत्व है।
कालाष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त:
इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दो दिन रहेगी।
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025 रात्रि 11:49 बजे से।
अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025 रात्रि 09:34 बजे।
चूँकि काल भैरव देव की पूजा रात्रि के समय की जाती है, इसलिए कालाष्टमी व्रत शनिवार, 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त:
निशीथ काल पूजा समय: रात्रि 11:19 से 12:03 बजे तक।
इस शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा करने से भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कालाष्टमी पर बन रहे हैं विशेष योग:
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 16 अगस्त को कालाष्टमी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिन के महत्व को और भी बढ़ा रहे हैं:
वृद्धि योग: यह योग प्रातः 07:21 बजे तक रहेगा। इस योग में किए गए सभी शुभ कार्य फलदायी माने जाते हैं।
ध्रुव योग: वृद्धि योग के बाद ध्रुव योग प्रारंभ होगा। ध्रुव योग में कोई भी भवन या संरचना बनवाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कालाष्टमी व्रत पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएँ और व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव और काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पुष्प, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। काल भैरव के मंत्रों का जाप करें और 'काल भैरव अष्टक' का पाठ करें। पूरी श्रद्धा से पूजा करने के बाद आरती करें।
कालाष्टमी का महत्व:
भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है, जो भक्तों की सभी बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के मन से सभी प्रकार के भय दूर हो जाते हैं। यह पूजा तंत्र-मंत्र और बुरी शक्तियों के प्रभाव को समाप्त करती है। यह पूजा कुंडली में मौजूद शनि, राहु और केतु जैसे अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने में भी सहायक है। मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान काल भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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