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धर्म-अध्यात्म
Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत में महिलाएं क्यों पहनती हैं जितिया धागा, जानें इसका महत्व
Sarita
11 Sept 2025 9:53 AM IST

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Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस व्रत में महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। बिहार में जितिया व्रत का त्योहार 3 दिनों तक मनाया जाता है, जिसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। जितिया व्रत से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिनमें से एक है लाल या पीले धागे में जिउतिया लॉकेट पहनना।
जिउतिया धागा क्यों पहनते हैं?
जितिया व्रत में पहने जाने वाले धागे को जिउतिया माला या जिउतिया लॉकेट कहते हैं। इस व्रत में इस लॉकेट का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस माला को पहने बिना यह व्रत पूरा नहीं होता। यह लाल या पीले रंग का धागा होता है, जिसमें सोने या चांदी के लॉकेट या गांठें बंधी होती हैं। लॉकेट की संख्या संतान की संख्या के अनुसार होती है और शुभता के लिए एक अतिरिक्त लॉकेट या गांठ जोड़ी जाती है। कुछ लॉकेट पर भगवान जीमूतवाहन की आकृति भी बनी होती है।
जितिया व्रत में लॉकेट का महत्व:
यह माला या धागा जितिया व्रत में इसलिए पहना जाता है क्योंकि यह संतान की दीर्घायु, सुरक्षा और उत्तम स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक है। यह माता की आस्था और मातृत्व के समर्पण को भी दर्शाता है। जितिया के बिना व्रत अधूरा माना जाता है क्योंकि इसके बिना व्रत का मनचाहा फल नहीं मिलता और व्रत अधूरा रहता है।
संतान की दीर्घायु:- यह धागा और लॉकेट संतान की दीर्घायु और उनके जीवन में आने वाले संकटों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
संकल्प का प्रतीक:- यह केवल एक आभूषण ही नहीं है, बल्कि संतान के प्रति माता की आस्था और संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है।
व्रत का समापन:- ऐसी मान्यता है कि जितिया धागे और लॉकेट के बिना जितिया व्रत अधूरा माना जाता है। साथ ही, इसके बिना व्रत का फल भी प्राप्त नहीं होता है।
धार्मिक महत्व:- इस धागे को "रक्षा सूत्र" भी माना जाता है और इसे धारण करने से व्रत की सफलता सुनिश्चित होती है।
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