धर्म-अध्यात्म

Jitiya Vrat 2025: इस दिन रखा जाएगा जितिया व्रत, जानें व्रत के नियम और पूजा विधि

Sarita
29 Aug 2025 12:02 PM IST
Jitiya Vrat 2025: इस दिन रखा जाएगा जितिया व्रत, जानें  व्रत के नियम और पूजा विधि
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  • Jitiya Vrat 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है. यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से करती हैं. इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि इसे निर्जला यानी बिना अन्न और जल ग्रहण किए पूरा किया जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से संतान पर आने वाले संकट दूर हो जाते हैं और परिवार में शांति बनी रहती है|
जितिया व्रत शुभ मुहूर्त :
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 14 सितंबर 2025 को सुबह 05:04 बजे होगा और इसका समापन 15 सितंबर को रात 03:06 बजे होगा. इस प्रकार जितिया व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा|
जितिया व्रत के नियम:
यह व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी अन्न-जल का सेवन नहीं किया जाता.
व्रत अष्टमी के सूर्योदय से लेकर नवमी के सूर्योदय तक चलता है.
इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है|
व्रत से एक दिन पहले केवल सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है और मांस, प्याज, लहसुन, शराब आदि का सेवन वर्जित होता है.
पूजा के लिए कुश से बनाए गए जीमूतवाहन की मूर्ति की स्थापना होती है. कई जगहों पर मादा चील और मादा सियार की प्रतिमा भी पूजी जाती है|
जितिया व्रत पूजा विधि:
शुभ मुहूर्त में जीमूतवाहन की मूर्ति को जल से भरे पात्र में स्थापित करें.
इसके बाद धूप, दीप, फूल, माला, अक्षत्, सरसों का तेल, खल्ली और बांस के पत्तों से पूजा करें|
लाल और पीली रूई अर्पित करें|
मिट्टी और गोबर से बनी मादा चील और सियार की प्रतिमा को दही, चूड़ा, सिंदूर, खीरा, केराव आदि चढ़ाएं और उनके माथे पर सिंदूर का टीका लगाएं|
पूजा के बाद व्रती को जितिया व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए, क्योंकि कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है.
कथा के उपरांत संतान की मंगलकामना और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें.
पारण विधि:
नवमी तिथि पर पारण के समय परंपरागत भोजन जैसे तोरई और नोनी साग की सब्जी, रागी की रोटी आदि बनाकर ग्रहण किया जाता है. पारण से पहले दान-दक्षिणा देना शुभ माना गया है|
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