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धर्म-अध्यात्म
माताओं का खास पर्व जितिया 2026 जानें व्रत और पूजा का शुभ समय
Ratna Netam
28 Sept 2026 9:04 PM IST

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धर्म : हिंदू धर्म में कई व्रत और त्योहार संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए रखे जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत है **जीवित्पुत्रिका व्रत**, जिसे आमतौर पर **जितिया व्रत या जिउतिया व्रत** के नाम से जाना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।जितिया व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि कई महिलाएं निर्जला रहकर भगवान से अपने बच्चों की मंगलकामना करती हैं।
जितिया व्रत 2026 कब रखा जाएगा?
पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में भी यह व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि के अनुसार मनाया जाएगा।व्रत की सही तिथि अलग-अलग स्थानों के पंचांग और सूर्योदय के समय के आधार पर कुछ क्षेत्रों में अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना शुभ माना जाता है।
प्रदोष काल में होती है पूजा
जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के समय में करना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं और संतान की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।प्रदोष काल में पूजा करने का उद्देश्य भगवान से संतान की रक्षा और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त करना होता है।
भगवान कृष्ण से जुड़ी है मान्यता
जितिया व्रत की कथा भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित के जीवन की रक्षा की थी।कहा जाता है कि इसी कारण संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए माताएं यह व्रत करती हैं। हालांकि, जितिया व्रत की मुख्य कथा राजा जीमूतवाहन से जुड़ी है।
राजा जीमूतवाहन की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा जीमूतवाहन बहुत दयालु और धर्मप्रिय थे। उन्होंने दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन तक त्यागने का संकल्प लिया था।कथा के अनुसार, एक नाग परिवार के सदस्य की रक्षा के लिए राजा जीमूतवाहन ने स्वयं को बलिदान के लिए प्रस्तुत कर दिया। उनकी इस महान भावना से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनका जीवन सुरक्षित हो गया।इसी त्याग और संतान रक्षा की भावना को याद करते हुए जितिया व्रत रखा जाता है।
जितिया व्रत की पूजा विधि
जितिया व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है।पूजा में फूल, अक्षत, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई जगहों पर मिट्टी या कुश से भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी है।इसके बाद व्रत कथा सुनी जाती है और संतान की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की जाती है।
नहाय-खाय से शुरू होती है परंपरा
कई क्षेत्रों में जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय की परंपरा से होती है। इसके बाद व्रती महिलाएं नियमों का पालन करते हुए व्रत रखती हैं।व्रत के दौरान सात्विक भोजन, धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का विशेष ध्यान रखा जाता है।
जितिया व्रत का महत्व
जितिया व्रत को मातृत्व प्रेम और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, सफलता और लंबी उम्र के लिए यह कठिन व्रत करती हैं।यह पर्व परिवार के प्रति प्रेम, विश्वास और धार्मिक आस्था को दर्शाता है।
किन बातों का रखें ध्यान
- व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें।
- पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ समय जरूर देखें।
- धार्मिक परंपराओं का पालन श्रद्धा और नियमों के अनुसार करें।
- व्रत कथा और पूजा विधि को सही तरीके से समझकर ही व्रत करें।
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