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धर्म-अध्यात्म
Indira Ekadashi 2025 : पितृ पक्ष में क्यों महत्वपूर्ण है इंदिरा एकादशी का श्राद्ध
Sarita
10 Sept 2025 9:35 AM IST

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Indira Ekadashi 2025 : इंदिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 को है। शास्त्रों में पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रंथों में कहा गया है कि श्राद्ध के दिनों में भगवान विष्णु की पूजा करने से पितृ तृप्त होते हैं, क्योंकि इंदिरा एकादशी व्रत करने वालों और उनके पूर्वजों के लिए बैकुंठ धाम का मार्ग सुगम हो जाता है। आइए जानते हैं कि पुराणों में इंदिरा एकादशी व्रत और श्राद्ध के बारे में क्या कहा गया है।
इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध का महत्व:
पुराणों में बताया गया है कि कन्यादान जितना पुण्य, हजारों वर्षों की तपस्या और उससे भी अधिक पुण्य इंदिरा एकादशी के व्रत और उस दिन श्राद्ध करने मात्र से प्राप्त होता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस एकादशी पर श्राद्ध करने वाले व्यक्ति की सात पीढ़ियों तक के पितरों को मुक्ति मिल जाती है। यह पितरों को जीवन-मरण के चक्र से मुक्त कर उन्हें बैकुंठ धाम ले जाता है।
यम की यातनाओं से मुक्ति:
गुरुड़ पुराण के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति एकादशी का व्रत रखता है और एकादशी को ही मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसकी आत्मा को यमलोक की यातनाएँ नहीं झेलनी पड़तीं। यही कारण है कि पितृ पक्ष में एकादशी तिथि का श्राद्ध बहुत महत्वपूर्ण है। यह पितरों की आत्मा को शक्ति प्रदान करता है और उनके लिए मोक्ष के द्वार खोलता है।
इस एकादशी के प्रभाव से राजा इंद्रसेन संसार में सुख भोगने के बाद अंततः स्वर्ग गए और उनके पिता को भी मोक्ष की प्राप्ति हुई।
इंदिरा एकादशी पर क्या करें:
इंदिरा एकादशी पर घी, दूध, दही और अन्न दान करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस तिथि पर जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएँ और तर्पण, पिंडदान करें, ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं। इन चीजों का दान करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। धन लाभ होता है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
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