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धर्म-अध्यात्म
Indira Ekadashi 2025: जानिए इंदिरा एकादशी पर शिवलिंग की पूजा का रहस्य
Sarita
16 Sept 2025 11:05 AM IST

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Indira Ekadashi 2025: इंदिरा एकादशी केवल विष्णु व्रत ही नहीं है। पितृ पक्ष की इस पावन तिथि से शिवलिंग पूजन का भी संबंध है। शास्त्र बताते हैं कि पितृ दोष निवारण और भक्त की मुक्ति के लिए विष्णु और शिव की पूजा का संयोजन आवश्यक है। प्रत्येक भक्त के लिए इस दिन के महत्व को समझना ज़रूरी है, क्योंकि केवल व्रत करने से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती, शिवलिंग अभिषेक के बिना पितृ दोष निवारण अधूरा है।
शिव और विष्णु का गहरा संबंध:
शास्त्र बताते हैं कि भगवान शिव और विष्णु एक दूसरे के पूरक हैं। विष्णु की पूजा शिव के बिना और शिव की पूजा विष्णु के बिना अधूरी मानी जाती है। इंदिरा एकादशी पर पितरों को तृप्त करने का कार्य विष्णु की कृपा से होता है, लेकिन पितृ दोष से मुक्ति का मार्ग शिव की कृपा से खुलता है। यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है।
शिव पूजन इस एकादशी से क्यों जुड़ा है?
गरुड़ पुराण और पद्म पुराण दोनों में वर्णन है कि पितरों की आत्मा को शांति तभी मिलती है जब शिव और विष्णु दोनों की पूजा की जाए। शिव को पितृनाथ अर्थात पितरों का स्वामी कहा जाता है। विष्णु को मोक्षदाता अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। इसीलिए इंदिरा एकादशी पर दोनों देवताओं की पूजा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूजा विधि:
सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु की पूजा के बाद शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें।
विष्णु को तुलसी और पीले फूल चढ़ाएँ।
पितरों का तर्पण करें और ज़रूरतमंदों को दान दें।
रहस्य और लाभ:
शास्त्रों के अनुसार, इंदिरा एकादशी पर शिव और विष्णु दोनों की पूजा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितृदोष से मुक्ति मिलती है। जीवन में आर्थिक संकट दूर होते हैं। घर में संतान की सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इस प्रकार इंदिरा एकादशी केवल विष्णु पूजा तक ही सीमित नहीं है। यह वह दिन है जब विष्णु व्रत और शिव पूजा का संयोग पितरों की तृप्ति और भक्त के मोक्ष, दोनों को सुनिश्चित करता है।
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