धर्म-अध्यात्म

Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि के कितने फेरे हैं शुभ? जानें शास्त्रों में क्या है सही संख्या

Sarita
1 March 2026 12:52 PM IST
Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि के कितने फेरे हैं शुभ? जानें शास्त्रों में क्या है सही संख्या
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Holika Dahan 2026 : हिंदू धर्म में होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन पारंपरिक रूप से होली से एक रात पहले मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पॉजिटिविटी का स्वागत करने के लिए होलिका की आग में नेगेटिविटी को जलाया जाता है। 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को होगा। लोग अक्सर सोचते हैं कि होलिका पूजा के दौरान आग के कितने चक्कर लगाना या परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। आइए शास्त्रों और पंचांग के अनुसार सही संख्या और उसका महत्व जानें।
शास्त्रों में सही संख्या क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की आग के एक, तीन या सात चक्कर लगाए जाते हैं। इन संख्याओं का अपना आध्यात्मिक महत्व है।
1 चक्कर
एक चक्कर लगाने का मतलब है अपने मन में कोई संकल्प लेना। यह चक्कर बुराई को छोड़ने और पॉजिटिव सोच अपनाने का प्रतीक है।
3 फेरे
तीन फेरे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीन गुणों (सत्व, रज और तम) के प्रतीक हैं। ज़्यादातर लोग तीन फेरे लगाते हैं। यह संख्या संतुलन और शुभता का प्रतीक है।
माना जाता है कि सात फेरे जीवन के सात वचनों, सात जन्मों और सात लोकों से जुड़े होते हैं। जो लोग किसी खास इच्छा से होलिका की पूजा करते हैं, वे सात फेरे लगाते हैं। इसे बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
परिक्रमा करने का सही तरीका
होलिका जलाने से पहले कच्चा धागा, नारियल, गेहूं की बालियां, गुड़ और चना चढ़ाएं।
आग जलाने के बाद, हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
घड़ी की दिशा में (दाईं ओर से) परिक्रमा करें।
परिक्रमा करते समय, परिवार की सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।
आखिर में, होलिका की राख को माथे पर तिलक की तरह लगाना शुभ माना जाता है।
परिक्रमा करने का आध्यात्मिक महत्व
ज्योतिष के अनुसार, आग को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि होलिका की परिक्रमा करने से शरीर और मन से नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
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