धर्म-अध्यात्म

Hayagriva Jayanti: हयग्रीव जयंती का यह उपाय आपको बनाएगा तेज बुद्धि का मालिक

Sarita
8 Aug 2025 8:59 AM IST
Hayagriva Jayanti: हयग्रीव जयंती का यह उपाय आपको बनाएगा तेज बुद्धि का मालिक
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Hayagriva Jayanti: श्री हरि विष्णु के अवतार अश्व मुख वाले भगवान हयग्रीव का जन्मदिवस हयग्रीव जयन्ती के रुप में मनाया जाता है। ये अद्वितीय अवतार है, इनका मुंह घोड़े जैसा तथा शरीर मनुष्य की भांति है। इस रुप में हयग्रीव नाम के दैत्य का भगवान विष्णु ने वध कर वेदों की रक्षा करी थी। हयग्रीव दैत्य को ब्रह्मा जी का वरदान था की उसका वध उसी के समान नाम और रूप वाला कर सकता है। किसी अन्य के हाथों वे कभी परास्त नहीं हो सकता था। भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर हयग्रीव दैत्य का वध कर दिया।
हयग्रीव जयंती शुभ मुहूर्त:
हयग्रीव जयन्ती का पर्व शुक्रवार 8 अगस्त 2025 को है। हयग्रीव जयन्ती का शुभ मुहूर्त- 04:30 पी एम से 07:12 पी एम तक है यानि कुल 02 घण्टे 41 मिनट। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 8 अगस्त 2025 को 02:12 पी एम पर होगा और समापन 9 अगस्त 2025 को 01:24 पी एम बजे होगा।
हयग्रीव जयंती का शास्त्रीय महत्व:
शास्त्रों के अनुसार देवी भागवत पुराण, अग्नि पुराण और स्कंद पुराण में हयग्रीव की स्तुति और अवतार का विस्तृत वर्णन है। यह जयंती विद्यार्थियों, वेदाध्ययन करने वालों, शोधकर्ताओं और ध्यान-साधकों के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्ञान की प्राप्ति, स्मरण शक्ति में वृद्धि, शुद्ध बुद्धि का विकास और आध्यात्मिक साधना में प्रगति का दिन है हयग्रीव जयंती।
हयग्रीव जयंती पर क्या न करें:
तामसिक भोजन (मांस, मद्य आदि) से परहेज करें।
असत्य भाषण, अपवित्र वचन या क्रोध से बचें।
पूजा बिना स्नान या विधिवत संकल्प के न करें।
हयग्रीव जयंती पर क्या करें:
हयग्रीव जयंती के दिन घोड़े का दर्शन करना शुभ माना जाता है।
हयग्रीव जयंती पर घोड़े को हरी घास या गुड़ खिलाना, चींटियों और मछलियों को भोजन कराना पुण्यकारी माना जाता है।
छात्र इस दिन पठन सामग्री, कलम, पुस्तक आदि की पूजा कर सकते हैं।
ध्यान करते समय मंत्र का उच्चारण नासिका और कंठ के बीच ध्यान केंद्रित करके करें, जिससे ऊर्ध्व ज्ञान नाड़ी सक्रिय होती है।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
हयग्रीव महामंत्र एवं स्तोत्र:
हयग्रीव गायत्री मंत्र:
ॐ वदवमुखाय विद्महे। हयग्रीवाय धीमहि। तन्नो वेदः प्रचोदयात्॥
ॐ ह्रीं ऐं हयग्रीवाय नमः॥
श्वेतवर्णं शुद्धसत्त्वं शुद्धविद्याधरं हरिम्।
हयग्रीवं महादेवं वन्दे वेदस्य नायकम्॥
हयग्रीव साधना के लाभ:
मेधा शक्ति और स्मरण शक्ति की तीव्रता।
मंत्र सिद्धि में सहायता।
वेद, शास्त्र, संगीत, ज्योतिष, संस्कृत जैसे विद्याओं में दक्षता।
आध्यात्मिक उन्नति और चित्त की शुद्धता।
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