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धर्म-अध्यात्म
Hartalika Teej Vrat 2025: हरतालिका तीज व्रत रखने के बाद इसे जीवनभर रखना है जरूरी, विशेष परिस्थितियों में क्या करें
Sarita
24 Aug 2025 9:43 AM IST

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Hartalika Teej Vrat 2025: हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सौभाग्य, अखंड पति सुख और वैवाहिक जीवन की लंबी आयु के लिए किया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी और भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। यही कारण है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
भाद्रपद मास की तृतीया को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत विवाहित महिलाओं के लिए सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है। इस दिन माता पार्वती ने तपस्या की थी और शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। मान्यता है कि यह व्रत न केवल पति को दीर्घायु प्रदान करता है बल्कि वैवाहिक जीवन की हर मुश्किल को आसान भी बनाता है। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या हरतालिका तीज का व्रत एक बार रखने के बाद जीवन भर रखना ज़रूरी है?
क्या एक बार शुरू करने के बाद इसे जीवन भर करना अनिवार्य है?
अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि अगर एक बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू कर दिया जाए, तो क्या उसे जीवन भर इसे करना पड़ता है? धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, तीज व्रत का महत्व बहुत बड़ा है और इसे बहुत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि एक बार महिला इस व्रत को शुरू कर दे, तो उसे इसे जीवन भर यथासंभव रखना चाहिए। क्योंकि यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन की कथा से जुड़ा है और इसे बीच में छोड़ना शुभ नहीं माना जाता है।
विशेष परिस्थितियों में क्या करें?
हालाँकि, अगर स्वास्थ्य कारणों, वृद्धावस्था या किसी अन्य मजबूरी के कारण कोई महिला हर साल यह व्रत नहीं रख पाती है, तो धार्मिक मान्यता कहती है कि उसे मन ही मन भगवान शिव पार्वती का ध्यान करके व्रत का संकल्प छोड़ने की अनुमति है। कई जगहों पर ऐसी परंपरा है कि ऐसी स्थिति में कोई अन्य महिला (परिवार की बहू या बेटी) उस व्रत को आगे भी रखती है।
धार्मिक दृष्टि से लाभ:
कहते हैं कि तीज व्रत न केवल वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाता है, बल्कि स्त्री के जीवन से कई कष्टों को भी दूर करता है। यह व्रत जीवनसाथी के प्रति समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है। यही कारण है कि महिलाएँ इसे पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रखती हैं। हरतालिका तीज व्रत अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। एक बार शुरू करने के बाद इसे आजीवन करने की परंपरा है, लेकिन यदि ऐसा करने में असमर्थ हों, तो शिव-पार्वती का ध्यान करने और संकल्प का त्याग करने की अनुमति भी शास्त्रों में दी गई है।
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