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धर्म-अध्यात्म
Hariyali Teej 2025: आप पहली बार रखने जा रही हैं हरियाली तीज व्रत,जानें सभी नियम,पूजा विधि Hariyali Teej 2025: आप पहली बार रखने जा रही हैं हरियाली तीज व्रत,जानें सभी नियम,पूजा विधि
Sarita
13 Jun 2025 12:57 PM IST

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Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज का पर्व हिन्दू संस्कृति में अत्यंत पावन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन वे पूरे श्रद्धा-भाव से उपवास रखती हैं और शिव-पार्वती का स्मरण करती हैं। मान्यता है कि इस उपवास के करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
हरियाली तीज 2024 की तिथि:
पंचांग के अनुसार, 2024 में हरियाली तीज का व्रत 7 अगस्त को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि की शुरुआत 6 अगस्त की रात 7:52 बजे से होगी और इसका समापन 7 अगस्त की रात 10:05 बजे होगा। अतः व्रती 7 अगस्त को विधिपूर्वक व्रत रखें।
पूजन सामग्री की सूची:
हरियाली तीज की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, जैसे- पूजा वेदी, पीले रंग का वस्त्र, केले के पत्ते, कच्चा सूत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, जनेऊ, सुपारी, कलश, अक्षत, दूर्वा, तेल, घी, कपूर, अबीर, गुलाल, नारियल, चंदन, गौ-दूध, गंगाजल, दही, चीनी, शहद और पंचामृत। इसके अलावा, माता पार्वती को अर्पण के लिए हरे रंग की साड़ी, सोलह श्रृंगार और सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, कंघी, इत्र आदि रखे जाने चाहिए।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं ऐसे करें तैयारी:
यदि आप नव विवाहित हैं और पहली बार हरियाली तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद हरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद सोलह श्रृंगार करें। पूजा की चौकी पर पीले कपड़े को बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। फिर पारंपरिक विधि से पूजन करें। हरियाली तीज की कथा का श्रवण या पाठ करना भी शुभ माना जाता है। अंत में आरती करें और घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। व्रत के दौरान संयम का पालन करते हुए सात्विक आहार लें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
भगवान शिव का पूजन मंत्र:
शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।
ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।
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