धर्म-अध्यात्म

Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज पर पूजा के लिए बन रहे हैं कई शुभ मुहूर्त, जानें इनके बारे में

Sarita
26 July 2025 7:17 AM IST
Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज पर पूजा के लिए बन रहे हैं कई शुभ मुहूर्त, जानें इनके बारे में
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Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसे सावन महीने में मनाया जाता है। इस साल 27 जुलाई को हरियाली तीज है। मान्यता है कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का दिन है। इस तिथि पर उपवास रखने से वैवाहिक जीवन सुखमय और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा हरियाली तीज पर हरे रंग का भी विशेष महत्व है। यदि इस तिथि पर हरे रंग की चीजों का दान और हरी चूड़ियां पहनी जाए, तो जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। साथ ही भाग्योदय भी होता है। वहीं यह तिथि कन्याओं के लिए और भी खास है। मान्यता है कि तीज पर यदि सच्चे भाव से महादेव को केवल जल और बेलपत्र अर्पित किया जाए, तो योग्य वर प्राप्ति के योग का निर्माण होता है। इस बार हरियाली तीज पर महालक्ष्मी राजयोग और रवि योग का विशेष संयोग बना हुआ है। ऐसे में पूजा का शुभ समय क्या है, आइए जानते हैं।
हरियाली तीज तिथि 2025:
पंचांग के मुताबिक सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 26 जुलाई को रात 10 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 27 जुलाई को रात 10 बजकर 41 मिनट पर है।
हरियाली तीज 2025 शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 46 मिनट से 05:30 मिनट तक रहने वाला है।
प्रातः सन्ध्या सुबह 5 बजकर 08 मिनट से 6:14 मिनट तक रहेगा।
निशिता मुहूर्त: रात्रि 12 बजकर 23 मिनट से लेकर पूरे दिन रहेगा।
सायाह्न सन्ध्या शाम 7 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक होगा।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:19 से 01:11 मिनट तक।
रवि योग: शाम 04 बजकर 23 मिनट से पूरे दिन रहने वाला है।
अमृत काल: दोपहर 1:56 से 3:34 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:55 से 3:48 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:16 से 7:38 मिनट तक।
हरियाली तीज पर महालक्ष्मी राजयोग:
ज्योतिषियों के मुताबिक हरियाली तीज पर चंद्रमा का सिंह राशि में गोचर रहेगा। यहां मंगल पहले से ही उपस्थित हैं। ऐसे में चंद्र-मंगल की युति से महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। ऐसे में पूजा-पाठ, दान, भजन-कीर्तन करना बेहद शुभ हो सकता है।
शिव जी की आरती :
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।
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