धर्म-अध्यात्म

Hariyali Teej 2025: जानिए हरियाली तीज पर हरे रंग की साड़ी और लाल आलता, जानें क्या है परंपरा

Sarita
25 July 2025 6:46 AM IST
Hariyali Teej 2025: जानिए हरियाली तीज पर हरे रंग की साड़ी और लाल आलता, जानें क्या है परंपरा
x
Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पूजनीय और शुभ माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में हरियाली तीज 27 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, पारंपरिक सोलह श्रृंगार करती हैं, भक्ति गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
इस अवसर पर हरे वस्त्र पहनना और पैरों में आलता लगाना एक विशेष परंपरा है, जो केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि इसके पीछे गहन धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं भी जुड़ी हैं|
हरियाली तीज और हरतालिका तीज, सजने-संवरने और व्रत में अंतर कैसा
हरे रंग की विशेषता:
हरा रंग जीवन, उर्वरता, ताजगी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. श्रावण में जब प्रकृति हरे रंग से ढक जाती है, तब यह रंग स्त्रियों के श्रृंगार में विशेष स्थान पाता है. साथ ही यह सौभाग्य, प्रेम और संतुलन का भी प्रतीक है. मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया और शिव से उनका मिलन इसी तिथि को हुआ. तभी से महिलाएं इस दिन हरे वस्त्र पहनकर माता की भक्ति करती हैं|
आलता लगाने की मान्यता:
पैरों में लगाया जाने वाला लाल आलता स्त्री के सौंदर्य और मंगल का प्रतीक है. यह देवी शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है और स्त्री के पवित्र पदचिन्हों से घर में सुख-समृद्धि आती है. धार्मिक दृष्टि से यह स्त्री को देवी का रूप मानकर उसके चरणों की पूजा के भाव को दर्शाता है|
इस तरह हरियाली तीज पर हरा रंग और आलता केवल पारंपरिक श्रृंगार नहीं, बल्कि स्त्री की आस्था, श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक भी हैं|
Next Story