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धर्म-अध्यात्म
Hariyali Teej 2025: व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां
Sarita
13 July 2025 7:26 AM IST

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Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज का पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। ये दिन माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक होता है, और महिलाएं इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से निर्जला व्रत रखती हैं। यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है।
इस दिन महिलाएं हरी चूड़ियाँ, लहरिया साड़ी, मेहंदी और सोलह श्रृंगार करके झूला झूलती हैं और मंगल गीत गाती हैं। लेकिन कई बार अज्ञानता या जल्दबाज़ी में कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनसे व्रत का पुण्य कम हो सकता है या उसका फल पूरी तरह नहीं मिल पाता। ऐसे में ज़रूरी है कि व्रत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें। आगे हम बताएंगे कि हरियाली तीज पर कौन-कौन सी बातें भूलकर भी नहीं करनी चाहिए ताकि आपका व्रत पूरी तरह सफल और फलदायी हो सके।
जानिए व्रत की सही तिथि और शुभ मुहूर्त:
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 26 जुलाई 2025 को रात 10 बजकर 41 मिनट पर हो रही है, और यह 27 जुलाई की रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत 26 जुलाई को ही रखा जाएगा, क्योंकि तृतीया तिथि का प्रारंभ इसी दिन हो रहा है।
अशुद्ध चीज़ों से दूरी बनाए रखें:
हरियाली तीज के दिन शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। चमड़े की वस्तुएं, मांस, मदिरा, अंडा जैसी अशुद्ध चीज़ों से दूर रहना जरूरी है। इनका स्पर्श या सेवन व्रत को खंडित कर सकता है और पुण्यफल में कमी आ सकती है।
मन को शांत और सकारात्मक रखें:
इस शुभ दिन पर क्रोध, कटुता या झगड़े से बचें। मन में नकारात्मक विचार न आने दें और किसी से बहस या क्लेश से दूर रहें। यह दिन प्रेम, शांति और समर्पण का होता है, इसलिए मानसिक शुद्धता उतनी ही जरूरी है जितनी बाहरी।
हरे और लाल रंग का करें सम्मान:
हरियाली तीज के दिन हरे और लाल रंग को धारण करना शुभ माना जाता है। ये रंग माता पार्वती के प्रिय माने जाते हैं। अगर कोई इन रंगों से बचता है या इन्हें त्यागता है, तो यह माता का अपमान माना जा सकता है और सौभाग्य पर इसका विपरीत असर हो सकता है।
देवताओं के प्रति रखें श्रद्धा:
इस दिन शिव-पार्वती समेत किसी भी देवी-देवता का अपमान नहीं होना चाहिए। पूजा में लापरवाही या अनादर व्रत के फल को कम कर सकता है। भावनाओं और श्रद्धा से की गई पूजा ही इस दिन का सार है।
व्रत के नियमों का करें पालन:
अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत कर रही हैं, तो इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करें। दिन भर निर्जला (बिना पानी के) और निराहार (बिना भोजन के) रहना व्रत की आत्मा मानी जाती है। यहीं से शक्ति और आशीर्वाद की अनुभूति होती है।
हरियाली तीज केवल देवी-देवताओं की पूजा का दिन ही नहीं, बल्कि पूरे दिन संयम और शालीनता का दिन है।
किसी का भी न करें अनादर:
हरियाली तीज केवल देवी-देवताओं की पूजा का दिन ही नहीं, बल्कि पूरे दिन संयम और शालीनता का दिन है। किसी भी व्यक्ति से तुच्छ व्यवहार, कटु वचन या तिरस्कार व्रत की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है। दूसरों का सम्मान करना इस दिन की सच्ची साधना है।
व्रत के दिन संयमित जीवनशैली अपनाना अनिवार्य है। ब्रह्मचर्य का पालन करके तन और मन दोनों की पवित्रता बनाए रखें। इससे व्रत का प्रभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ जाती है।
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