धर्म-अध्यात्म

Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या पर क्यों किया जाता है नांदीमुख श्राद्ध, क्या होगा लाभ

Sarita
23 July 2025 12:16 PM IST
Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या पर क्यों किया जाता है नांदीमुख श्राद्ध, क्या होगा लाभ
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Hariyali Amavasya 2025: सावन माह की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस बार यह अमावस्या 24 जुलाई 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पुष्य नक्षत्र भी बन रहा है। इस दिन वृक्षारोपण का भी महत्व है और इस दिन नांदीमुख श्राद्ध भी किया जाता है। श्राद्ध मुख्यतः 5 प्रकार के होते हैं- नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि और पार्वण। इनमें से नांदीमुख श्राद्ध को वृद्धि श्राद्ध या आभुदायिक श्राद्ध भी कहा जाता है।
क्यों करते हैं नान्दीमुख श्राद्ध?
1. पहला कारण: जब भी घर परिवार में कोई विवाह, गृह प्रवेश, अन्य मांगलिक कार्य किए जाते हैं तो कार्य में किसी भी प्रकार के पितरों की ओर से कोई विघ्न न हो और उनका आशीर्वाद प्राप्त हो, इसलिए मांगलिक कार्य के पूर्व नान्दीमुख श्राद्ध करने का विधान है। यह श्राद्ध किसी भी अमावस्या को या शुभ अवसरों पर कर सकते हैं। वर्तमान में देव सो गए हैं इसलिए मांगलिक कार्य बंद है। उससे पूर्व ही यह श्राद्ध करते हैं। नंदी का अर्थ है सुख या आनंद और मुख का अर्थ है मुख या आरंभ। यानी सुखद या शुभ कार्यों के प्रारंभ से पहले पितरों का स्मरण और तर्पण करना। नान्दीमुख श्राद्ध यह 'प्रेत श्राद्ध' नहीं होता, बल्कि यह शुभता के लिए किया जाने वाला श्राद्ध होता है।
2. दूसरा कारण: यदि किसी के भी घर परिवार में किसी भी परिजन का देहांत हो गया है और उसका अभी तक श्राद्ध नहीं किया है। यानी पहली बार श्राद्ध किया जा रहा है तो फिर विधिवत रूप से नान्दीमुख श्राद्ध करते हैं। यानि किसी भी पितर का पहली बार श्राद्ध किया जा रहा है तो उसका नांदी श्राद्ध करते हैं। इससे पितरों को मुक्ति मिलती है और वे अपनी संतानों को इस कार्य के लिए भरपूर आशीर्वाद देते हैं। हरियाली अमावस्या से पितरों को मुक्ति देने के लिए एक बहुत ही शुभ और शक्तिशाली दिन माना जाता है। इसमें पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले कर्म तर्पण, सपिंडक, पिंडदान आदि कर्म करने का एक विधान भी है।
नांदी श्राद्ध कैसे करते हैं?
नंदी श्राद्ध की विधि शिव पुराण में विस्तार से बताई गई है। पंडितों के माध्यम से इस श्राद्ध को कराया जाता है। इस श्राद्ध को करने में प्रारंभ से लेकर कई तरह के कर्मकांड किए जाते हैं। षोडशमातृका पूजन, सप्त घृत मातृका, वसोर्धारा के अंतर्गत पवित्रिकरण, पवित्रीधारण, आचमन, आसन शुद्धि, शिखा बंधन, प्राणायाम, पंचगव्य निर्माण, संकल्प, आवाहन, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, आशीर्वाद ग्रहण आदि अनेक कर्म करते हैं। इसमें सबसे पहले मातृका पूजन और वसोर्धारा का कर्मकांड करते हैं। इसके बाद सपिण्ड, पिंड रहित, आमान्न और हेम श्राद्ध करते हैं।
नांदीमुख श्राद्ध करने का लाभ क्या है?
इस श्राद्ध को करने से सभी तरह के मांगलिक कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होते हैं।
इस श्राद्ध को करने से सभी तरह के पितृदोष, देव दोष, सर्प दोष आदि दूर हो जाते हैं।
इससे का भरपूर आशीर्वाद मिलता है जिसके चलते जीवन में चली आ रही समस्याओं का निदान होता है।
इस श्राद्ध को करने से पितरों को शांति मिलती हैं और वे सद्गति को प्राप्त होते हैं।
यह श्राद्ध जातक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि को लाता है।
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