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धर्म-अध्यात्म
Harihar Milan 2025: हरि हर मिलन के दिन घर में ये करना न भूलें,कामयाबी चूमेगी आपके कदम
Sarita
4 Nov 2025 7:29 AM IST

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Harihar Milan 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आने वाली बैकुंठ चतुर्दशी अत्यंत शुभ और दुर्लभ मानी जाती है। यह पर्व उस दिव्य क्षण का प्रतीक है जब भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की संयुक्त पूजा से मोक्ष, धन, सुख और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
बैकुंठ चतुर्दशी का पौराणिक महत्व:
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने काशी (वाराणसी) में आकर भगवान शिव को शालिग्राम अर्पित किया था। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर विष्णु को सुदर्शन चक्र का वरदान दिया और कहा, “जो भक्त इस दिन मेरा और विष्णु का संयुक्त पूजन करेगा, वह बैकुंठ लोक की प्राप्ति करेगा।”
इसलिए इस दिन की पूजा शैव और वैष्णव दोनों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह दिन पापों से मुक्ति, अकाल मृत्यु से रक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है।
बैकुंठ चतुर्दशी पर क्या करें (पूजन विधि):
प्रातः स्नान व संकल्प:
प्रातःकाल गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद यह संकल्प लें, “मैं शिव-विष्णु की संयुक्त उपासना कर सभी दोषों से मुक्त होऊं।”
बैकुंठ चतुर्दशी भगवान विष्णु की पूजा:
विष्णु जी को तुलसी पत्ते, पीले पुष्प, और पीले वस्त्र अर्पित करें। ॐ नमो नारायणाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
भगवान शिव की पूजा:
शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, जल और धतूरा चढ़ाएं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
संयुक्त आरती करें: पहले विष्णु जी की आरती और फिर शिव जी की आरती करें। दोनों देवों की संयुक्त पूजा बैकुंठ द्वार खोलने का प्रतीक है।
दीपदान करें: रात्रि में घर के उत्तर-पूर्व दिशा में दीपक जलाएं। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संकेत है और धन-समृद्धि को आकर्षित करता है।
बैकुंठ चतुर्दशी के लाभ:
मोक्ष की प्राप्ति: इस दिन का व्रत करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
धन और सुख की वृद्धि: लक्ष्मी और शिव-कुबेर की कृपा से धन के द्वार खुलते हैं।
स्वास्थ्य लाभ: शिव के अभिषेक से रोग दूर होते हैं और आयु बढ़ती है।
परिवारिक सुख: पति-पत्नी में प्रेम बढ़ता है और पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं।
कर्म शुद्धि: इस दिन किया गया दान-पुण्य सहस्रगुना फल देता है।
बैकुंठ चतुर्दशी का आध्यात्मिक रहस्य:
यह तिथि शैव और वैष्णव धर्मों की एकता का प्रतीक है। जब शिव और विष्णु एक-दूसरे का पूजन करते हैं, तो यह संदेश मिलता है कि “धर्म का मूल एक ही है सद्भाव, करुणा और समर्पण।”
इस दिन मन, वाणी और कर्म की शुद्धि से व्यक्ति के भीतर बैकुंठ जैसी चेतना जाग्रत होती है। बैकुंठ चतुर्दशी केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान और देवत्व की अनुभूति का अवसर है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा से पूजा, दान और ध्यान करता है, वह शिव-विष्णु दोनों की कृपा का अधिकारी बनता है। शास्त्र कहते हैं, “यत्र हरः यत्र हरिः तत्र श्रीः” जहां शिव और विष्णु हैं, वहां सदा लक्ष्मी और शांति का वास होता है।
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