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धर्म-अध्यात्म
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश पूजन में क्यों चढ़ाए जाते हैं 21 पत्ते, जानिए पूरी सूची और महत्व
Sarita
23 Aug 2025 8:12 AM IST

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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है. इस दिन गणपति बप्पा की स्थापना कर 10 दिनों तक उनका पूजन किया जाता है. परंपरा है कि गणेशजी को मोदक और लड्डू के साथ 21 पत्तों (पत्रों) से पूजा की जाती है, जिसे पत्र पूजा कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार इन पत्तों का अलग-अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. माना जाता है कि 21 पत्र अर्पित करने से विघ्नहर्ता गणपति जल्दी प्रसन्न होकर भक्तों के जीवन से संकट दूर करते हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं|
21 पत्र अर्पित करने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि इसमें गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है. हर पत्ता एक विशेष शक्ति, गुण और आशीर्वाद का प्रतीक है.जैसे दूर्वा समृद्धि का, शमी विजय का, बेल पवित्रता का और धतूरा उग्र शक्तियों को शांत करने का प्रतीक है. खास बात यह है कि सामान्य दिनों में गणपति को तुलसी पत्र नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन गणेश चतुर्थी पर इसे शुभ माना जाता है|
21 पत्तों की सूची:
शमी पत्र इसे विजय और पाप नाशक माना गया है.
भृंगराज पत्र आयुर्वेद में आयु और ऊर्जा देने वाला.
बेल पत्र त्रिदेवों का प्रतीक, शिव और गणपति को प्रिय.
दूर्वा पत्र गणपति का सबसे प्रिय, समृद्धि का प्रतीक.
बेर पत्र सरलता और संतोष का द्योतक।
धतूरा पत्र उग्र ऊर्जा को शांत करने वाला।
तुलसी पत्र सामान्यतः गणपति को नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन गणेश चतुर्थी पर अपवाद स्वरूप अर्पित किया जाता है।
सेम पत्र अन्न और उर्वरता का प्रतीक।
अपामार्ग पत्र रोग निवारक और शुद्धि का द्योतक.
कण्टकारी पत्र बाधा नाशक और औषधीय गुणों वाला.
सिन्दूर पत्र सौभाग्य और मंगल का प्रतीक.
तेजपत्ता पत्र सुगंध, शांति और समृद्धि लाने वाला.
अगस्त्य पत्र ज्ञान और शक्ति का प्रतीक.
कनेर पत्र निडरता और साहस का प्रतीक.
केले का पत्र समृद्धि और उन्नति का प्रतीक.
आक पत्र रोग हरने वाला और गणेशजी का प्रिय.
अर्जुन पत्र धैर्य और शक्ति का प्रतीक.
देवदार पत्र शुद्धता और स्थिरता दर्शाने वाला.
मरुआ पत्र सुगंध और पवित्रता का प्रतीक.
कचनार पत्र उन्नति और सौंदर्य का द्योतक.
केतकी पत्रपवित्रता और मंगल कार्यों का प्रतीक.
इन पत्तों का महत्व:
गणेश पूजा में इन 21 पत्तों का प्रयोग केवल परंपरा नहीं बल्कि एक गहरी आस्था का हिस्सा है|
हर पत्र का अलग गुण और आशीर्वाद जुड़ा होता है, जैसे दूर्वा समृद्धि का प्रतीक है, बेल पवित्रता का और शमी विजय का|
यह भी मान्यता है कि इन पत्तों से पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है|
गणेश पुराण में वर्णन मिलता है कि एक समय तुलसी और गणपति ने एक-दूसरे को शाप दिया था. इसी कारण सामान्य दिनों में गणपति को तुलसी पत्र अर्पित नहीं किया जाता लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन यह अपवाद माना जाता है और इस दिन तुलसी पत्र चढ़ाना शुभ फलदायी होता है. इस तरह 21 पत्तों की पूजा गणपति के लिए सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है|
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