धर्म-अध्यात्म

Ganesh Chaturthi 2025: जानिए भाद्रपद माह में ही क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी

Sarita
24 Aug 2025 8:22 AM IST
Ganesh Chaturthi 2025:  जानिए भाद्रपद माह में ही क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी
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Ganesh Chaturthi 2025: भक्ति, उल्लास और श्रद्धा से भरे दस दिवसीय गणेश उत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जब-जब भाद्रपद का महीना आता है, भक्तों का मन प्रभु श्री गणेश की आराधना में रमता है। बप्पा के स्वागत के लिए घर-आंगन सजे जाते हैं और वातावरण "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारों से गूंज उठता है। यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच एक आत्मीय संबंध का पर्व बन जाता है। हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को विशेष रूप से समर्पित माना गया है, लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। आखिर क्यों इसी दिन से गणेश उत्सव का शुभारंभ होता है? और क्या है इस तिथि का आध्यात्मिक महत्व? आइए, जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़ी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को विस्तार से |
भगवान गणेश का जन्म:
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान गणेश को अपने शरीर की दिव्य मिट्टी से उत्पन्न किया था। उन्होंने उन्हें द्वारपाल बनाकर बाहर खड़ा किया और स्वयं स्नान के लिए चली गईं। उसी समय भगवान शिव वहां पधारे, लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। यह देखकर भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ तो वे अत्यंत व्याकुल हो गईं और उन्होंने प्रलय लाने की चेतावनी दी।
हाथी के सिर से जीवनदान:
माता पार्वती की गंभीर नाराजगी को शांत करने के लिए भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा की ओर जाकर पहले प्राणी का सिर लेकर आएं, जो सो रहा हो और जिसकी मां अपनी पीठ उसकी ओर किए हुए हो। ऐसा ही एक हाथी मिला, और उसका सिर लाकर भगवान शिव ने गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार गणेश जी को पुनर्जीवन प्राप्त हुआ और वे "गजमुख" या "गजानन" कहलाए। तभी से उन्हें "प्रथम पूज्य" होने का आशीर्वाद भी मिला और यह दिन अत्यंत शुभ माना गया।
महाभारत लेखन की शुरुआत:
एक अन्य मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास के कहने पर महाभारत ग्रंथ का लेखन आरंभ किया था। इस पवित्र ग्रंथ को लिखने से पहले गणेश जी ने शर्त रखी थी कि वे लेखन बीच में नहीं रोकेंगे, और वेदव्यास जी को बिना रुके वाचन करना होगा। इसी व्रत के साथ इस महान कार्य की शुरुआत हुई थी। यही कारण है कि इस तिथि को बौद्धिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जाता है।
इन दोनों ही मान्यताओं का संबंध भगवान गणेश की कृपा, उनकी बुद्धिमत्ता और जीवन में बाधाओं के निवारण से जुड़ा है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को ही गणेश उत्सव की शुरुआत का कारण यही धार्मिक घटनाएं हैं। इस दिन से प्रारंभ होकर दस दिनों तक चलने वाला यह उत्सव केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें भक्तगण अपने आराध्य से जुड़ते हैं और जीवन के कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।
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