धर्म-अध्यात्म

Vat Purnima पर अपनाएं ये 5 उपाय

Ratna Netam
28 Jun 2026 3:36 PM IST
Vat Purnima  पर अपनाएं ये 5 उपाय
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दांपत्य जीवन होगा खुशहाल

Religion धर्म : वट पूर्णिमा का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे, तभी से इस व्रत की परंपरा शुरू हुई मानी जाती है।इस दिन वट वृक्ष की पूजा के साथ कुछ विशेष उपाय करने की भी परंपरा है, जिनसे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और घर में समृद्धि बनी रहने की मान्यता है।

बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत बांधने की परंपरा

पूजा के समय महिलाएं बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत 7 या 108 बार लपेटती हैं। हर फेरे के साथ वे अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। पूजा के बाद ब्राह्मण को सफेद सूत दान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

दान का महत्व

पूजा के बाद बांस का हाथ वाला पंखा, भीगे चने, फल और वस्त्र घर के बड़े बुजुर्गों को दान करने की परंपरा है। ऐसा करने के बाद उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कहा जाता है कि इससे पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और घर में प्रेम व सौहार्द बना रहता है।

शिव-पार्वती की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी की जाती है। महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और रिश्तों में मधुरता बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं। इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता आने की मान्यता है।

आर्थिक समस्या दूर करने का उपाय

यदि किसी व्यक्ति को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो, तो पूर्णिमा की रात चंद्रमा को कच्चे दूध में चावल और चीनी मिलाकर अर्घ्य देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे धन संबंधी समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं और घर में समृद्धि आती है।

पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

वट पूर्णिमा की पूजा में लाल, पीले या हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। काले, नीले और सफेद रंग के कपड़ों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। यदि आसपास बरगद का पेड़ उपलब्ध न हो, तो महिलाएं गमले में लगे पौधे या तुलसी के पौधे के सामने भी श्रद्धा से पूजा कर सकती हैं।वट पूर्णिमा का यह पर्व आस्था, परंपरा और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का संदेश भी देता है।

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