धर्म-अध्यात्म

Falgun Maah Niyam: देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए फाल्गुन महीने में पालन किए जाने वाले नियम

Sarita
2 Feb 2026 7:30 AM IST
Falgun Maah Niyam: देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए फाल्गुन महीने में पालन किए जाने वाले नियम
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Falgun Maah Niyam: आज 2 फरवरी से फाल्गुन का महीना शुरू हो रहा है। तीज-त्यौहार की दृष्टि से फाल्गुन का महीना अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस माह में महाशिवरात्रि से लेकर होली जैसे प्रमुख त्यौहार आते हैं। हिंदू धर्म में फाल्गुन को भक्ति और पुण्य का मास कहा जाता है। इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही राधा और कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। फाल्गुन में चंद्र देव की आराधना करना भी बहुत ही फलदायी माना गया है। ऐसे में फाल्गुन माह में इन नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि फाल्गुन में क्या करें और क्या नहीं।
फाल्गुन माह नियम:
भगवान शिव की पूजा:
फाल्गुन माह के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करें। इसके साथ ही सोमवार के दिन व्रत भी रखें। कहते हैं कि इस महीने में ऐसा करने से महादेव की अपार कृपा प्राप्त होती है। कहते हैं कि सावन के अलावा फाल्गुन मास भगवान शिव की भक्ति के लिए अति उत्तम माना जाता है।
चंद्र देव की पूजा:
फाल्गुन में चंद्र देव की उपासना करें। साथ ही चंद्रमा मंत्रों का जाप करें। अगर आपकी कुंडली में चंद्र कमजोर है तो चंद्र देव की पूजा के साथ ही सफेद चीजों का भी दान करें। कहते हैं कि ऐसा करने से चंद्र मजबूत होता है।
राधा-कृष्ण की पूजा:
बृज की धरती पर होली का उत्सव कई दिन पहले से आरंभ हो जाता है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से लोग आते हैं। फाल्गुन का महीना कृष्ण भक्ति के लिए अति उत्तम माना गया है। तो फाल्गुन में बांके बिहार और राधा रानी की सच्चे मन से भक्ति करें। ऐसा करने से आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम बना रहेगा।
इन जगहों पर जलाएं दीया:
फाल्गुन में घर के मुख्य द्वार, रसोई घर, तुलसी और घर की छत पर दीया जरूर जलाएं। इन जगहों पर दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है।
पूजा पाठ और दान-पुण्य करें:
फाल्गुन मास में दान-पुण्य करना भी बहुत ही लाभकारी माना गया है। ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और घर में सदैव खुशहाली बनी रहती है।
फाल्गुन माह में क्या करें और क्या नहीं?
इस महीने में सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
तामसिक भोजन (मांस-मदिरा, अंडा, प्याज, लहसुन) और चीजों से दूरी बनाकर रखें।
गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, धन और वस्त्र का दान करें।
किसी के लिए अपशब्द का प्रयोग न करें।
घर में पूजा स्थल या मंदिर की साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक रहता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
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