धर्म-अध्यात्म

Falgun Amavasya Vrat Katha: फाल्गुन अमावस्या के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना

Sarita
27 Feb 2025 8:06 AM IST
Falgun Amavasya Vrat Katha: फाल्गुन अमावस्या के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पूरी होगी हर मनोकामना
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Falgun Amavasya Vrat Katha: फाल्गुन अमावस्या को पवित्र नदी जैसे गंगा आदि में स्नान करने और स्नान के बाद दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. साथ ही, फाल्गुन अमावस्या पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है. फाल्गुन अमावस्या पर स्नान-दान के साथ ही व्रत कथा का पाठ करना बहुत फलदायी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि फाल्गुन अमावस्या की व्रत कथा का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ऐसे में आइए पढ़ते हैं फाल्गुन अमावस्या की व्रत कथा.हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन का महीना साल का अंतिम महीना होता है, इसके बाद आने वाले चैत्र माह से हिंदू नववर्ष का शुरू हो जाता है. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को फाल्गुन अमावस्या मनाते हैं जो कि आज यानी 27 फरवरी को मनाई जा रही है. फाल्गुन अमावस्या महाशिवरात्रि के पर्व के बाद आती है और हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या होती है. हिंदू धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है और इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है|
फाल्गुन अमावस्या व्रत कथा-
एक गांव में ब्राह्मण परिवार था जिसमें पति-पत्नी और उनकी एक पुत्री रहती थी. उनका जीवन सामान्य चल रहा था. उनकी पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और बढ़ती आयु के साथ उसमें स्त्रियों के गुणों का विकास होने लगा था. वह बहुत सुंदर, सुशील और सर्वगुण सम्पन्न थी लेकिन गरीब होने की वजह से उसका विवाह नहीं हो पा रहा था. एक दिन उस ब्राह्मण के घर पर एक साधु महाराज पहुंचे|
ब्राह्मण पुत्री ने साधु महाराज की खूब सेवा की और उसकी सेवा से प्रसन्न होकर साधु महाराज ने कन्या को लंबी उम्र का आशीर्वाद. लेकिन यह भी बताया कि उसके हथेली में विधवा योग है. इससे चिंतित होकर ब्राह्मण परिवार ने साधु से इस योग का कोई उपाय पूछा. तब साधु ने कुछ देर सोच-विचार के बाद बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है. वह महिला बहुत ही संस्कारों से संपन्न, पतिव्रता और निष्ठावान है|
अगर आपकी कन्या उस महिला की सेवा करे और इसके विवाह में वह महिला अपनी मांग का सिंदूर लगा दें, तो इस कन्या की कुंडली का विधवा योग दूर हो सकता है. साधु की यह बात सुनकर ब्राह्मण ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही और अगले दिन कन्या सुबह उठकर सोना धोबिन के घर चली गई. फिर रोजाना वह धोबिन के घर की साफ-सफाई और सारे काम अपने घर वापस चली जाती थी|
एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि तुम तो सवेरे उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता है. तब बहू ने कहा, “मांजी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं, मैं तो देर से उठती हूं. इसके बाद दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन सवेरे ही उनके घर का सारा काम करके चला जाता है|
कई दिनों बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या सुबह में उनके घर आती है और सारे काम करके चली जाती है. जब वह कन्या जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी और पूछने लगी कि वह कौन है जो ऐसे छुपकर उसके घर में काम करती है. तब कन्या ने साधु की कही गई सारी बात बताई. सोना धोबिन पतिव्रता थी और उसमें तेज था इसलिए वह इस बात के लिए तैयार हो गई|
सोना धोबिन के पति की तबियत थोड़ी खराब थी, इसलिए उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने के लिए कहा. सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिंदूर उस कन्या की मांग में लगाया, तो उसके पति की मृत्यु हो गई. थोड़े समय बाद उसे इस बात का पता चला, वह घर से निर्जल ही चली थी. सोना धोबिन यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर उसकी परिक्रमा करने के बाद ही जल पिएगी|
उस दिन फाल्गुन अमावस्या थी. उस ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की और फि जल ग्रहण किया. ऐसा करते ही उसका पति वापस जीवित हो गया. ऐसे में माना जाता है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है|
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