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धर्म-अध्यात्म
Falgun Amavasya Katha: आज फाल्गुन अमावस्या के दिन जरूर सुनें यह पौराणिक व्रत कथा
Sarita
17 Feb 2026 6:51 AM IST

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Falgun Amavasya Katha: 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को फाल्गुन अमावस्या मनाया जाता है। इस दिन स्नान-दान, व्रत और पूजा पाठ करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। अगर संभव हो तो अमावस्या के दिन गंगा या अन्य किसी पवित्र नदियों में स्नान जरूर करें। फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व होता है। अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही पूर्वजों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा इस दिन फाल्गुन अमावस्या की व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। तो यहां पढ़िए फाल्गुन अमावस्या की व्रत कथा।
फाल्गुन अमावस्या व्रत कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में ब्राह्मण अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता था। तीनों सामान्य जिंदगी जी रहे थे। समय बीतता जा रहा था ब्राह्मण की पुत्री धीरे-धीरे बढ़ी होने लगी थी। वह दिखने में अत्यंत सुंदर, सुशील और सर्वगण संपन्न थीं। लेकिन गरीबी की वजह से उसका विवाह कहीं नहीं हो पा रहा था। इस वजह से ब्राह्मण और उसकी पत्नी परेशान रहते थे। फिर एक दिन उनके घर एक साधु महाराज आए। ब्राह्मण की पुत्री ने उस साधु की खूब सेवा की। साधु ने सेवा से प्रसन्न होकर उसे दीर्घायु का आशीर्वाद दिया। इसके साथ ही साधु ने यह भी बताया कि उसके साथ में विधवा का योग है। यह बात सुनकर ब्राह्मण परेशान हो गए और इसका कोई उपाय पूछा। तब साधु ने कुछ देर सोचने के बाद कहा कि एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक स्त्री है जो अपने बेटे और बहू के साथ रहती है। वह महिला संस्कारों से संपन्न, निष्ठावान और पतिव्रता है। अगर आपकी कन्या उस महिला की सेवा करें और इसके विवाह में वह महिला अपनी मांग का सिंदूर लगा दें तो इस कन्या की कुंडली का विधवा योग दूर हो सकता है।
साधु की बात सुनकर ब्राह्मण ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही और अगले दिन कन्या सुबह उठकर सोना धोबिन के घर चली गई। फिर रोजाना वह धोबिन के घर की साफ-सफाई और सारे काम अपने घर वापस चली जाती थी। एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि तुम तो सवेरे उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता है। तब बहू ने कहा, 'मां जी मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं, मैं तो देर से उठती हूं। इसके बाद दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन सवेरे ही उनके घर का सारा काम करके चला जाता है।
कई दिनों बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या सुबह में उनके घर आती है और सारे काम करके चली जाती है। जब वह कन्या जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी और पूछने लगी कि वह कौन है जो ऐसे छुपकर उसके घर में काम करती है। तब कन्या ने साधु की कही गई सारी बात बताई। धोबिन पतिव्रता थी और उसमें तेज था इसलिए वह इस बात के लिए तैयार हो गई। धोबिन के पति की तबीयत थोड़ी खराब थी, इसलिए उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने के लिए कहा।
धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिंदूर उस कन्या की मांग में लगाया, तो उसके पति की मृत्यु हो गई। थोड़े समय बाद उसे इस बात का पता चला, वह घर से निर्जल ही चली थी। सोना धोबिन यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर उसकी परिक्रमा करने के बाद ही जल पिएगी। उस दिन फाल्गुन अमावस्या थी। उस ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की और फिर जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसका पति वापस जीवित हो गया। अतः जो व्यक्ति अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं की भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन व्रत करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
फाल्गुन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त:
फाल्गुन माह की अमावस्या तिथि का- आरंभ 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर
अमावस्या तिथि का समापन - 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर
अमावस्या के दिन स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 25 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 37 मिनट से 1 बजकर 23 मिनट तक
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