- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Falgun Amavasya 2026:...
धर्म-अध्यात्म
Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर करें पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ, मिलेगी पितरों की कृपा
Sarita
17 Feb 2026 11:32 AM IST

x
Falgun Amavasya 2026: इस साल फाल्गुन माह की अमावस्या 17 फरवरी को मनाई जाने वाली है. धार्मिक दृष्टि से अमावस्या की तिथि बहुत विशेष और पावन मानी जाती है. साल में 12 अमावस्या पड़ती है. हर एक अमावस्या का अपना महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है. अमावस्या के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. फिर दान-पुण्य करते हैं. पूजा-पाठ करते हैं. मान्यता है कि अमावस्या के दिन किए गए इन सभी कामों से पुण्य फल प्राप्त होते हैं. अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित की गई है, इसलिए इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है|
साथ ही अमावस्या के दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं, जिससे पितृ दोष से मुक्ति मिल जाती है. इसके अतिरिक्त, अमावस्या के अवसर पर पितृ निवारण स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ निवारण स्तोत्र का पाठ करने से कुंडली में उपस्थित पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं. जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. पूर्वजों की कृपा से परिवार में शांति, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा आती है, तो आइए जानते हैं पितृ निवारण स्तोत्र|
पितृ निवारण स्तोत्र:
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् । नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा । सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा । तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा । द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् । अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च । योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु । स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा । नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् । अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:। जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:। नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।
TagsFalgun Amavasyaफाल्गुन अमावस्यापितृ निवारणस्तोत्रपाठपितरोंकृपाFalgun AmavasyaPitru Nivaran Stotrarecitationancestors' blessings जनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





