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New Delhi नई दिल्ली : वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के राजकुमार बुध करीब 15 से 16 दिनों में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। इसी क्रम में 7 जुलाई 2026 को बुध अपनी स्वराशि मिथुन में गोचर कर रहे हैं और 4 अगस्त 2026 तक इसी राशि में बने रहेंगे। इस गोचर को संचार, व्यापार और बुद्धि से जुड़े कार्यों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को वाणी, बुद्धि, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है। अपनी ही राशि मिथुन में आने पर बुध की शुभता और प्रभाव क्षमता बढ़ जाती है, जिससे कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस अवधि में कुछ लोगों को व्यापार में उन्नति, करियर में सफलता और आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार होने की बात कही जा रही है।विशेष रूप से मिथुन राशि में बुध का यह गोचर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मिथुन राशि स्वयं बुध की ही स्वामी राशि है। इस दौरान इस राशि के जातकों के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है और रुके हुए कार्यों में गति आने के संकेत मिल रहे हैं।
नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय लाभकारी माना जा रहा है। कुछ जातकों को पदोन्नति और आय में वृद्धि का लाभ मिल सकता है। मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है और कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर रहेगा।व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह गोचर शुभ संकेत दे रहा है। व्यापारिक स्थिति मजबूत हो सकती है और नए अवसर प्राप्त होने की संभावना बढ़ सकती है। इस अवधि में वाणी में मधुरता और प्रभावशीलता देखने को मिल सकती है, जिससे लोगों के साथ संबंध बेहतर होंगे और सौदेबाजी में सफलता मिल सकती है।
हालांकि ज्योतिष के अनुसार इस दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। अनावश्यक वाद-विवाद से बचने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।कुल मिलाकर बुध का मिथुन राशि में गोचर कई लोगों के लिए सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो संचार, व्यापार, लेखन और मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं।





