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Ancient पद्धति नाड़ी ज्योतिष पर बढ़ा विश्वास और जिज्ञासा

New Delhi नई दिल्ली : भारत की प्राचीन ज्योतिष परंपराओं में नाड़ी ज्योतिष और वैदिक ज्योतिष दोनों का विशेष स्थान है। हालांकि दोनों ही पद्धतियां भविष्यवाणी और जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए उपयोग की जाती हैं, लेकिन इनके तरीके, आधार और प्रक्रिया में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
वैदिक ज्योतिष पूरी तरह से जन्म कुंडली पर आधारित होती है, जिसमें व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर ग्रहों की स्थिति, दशा और गोचर का अध्ययन किया जाता है। इसके माध्यम से व्यक्ति के जीवन, करियर, विवाह और भविष्य से जुड़ी संभावनाओं का अनुमान लगाया जाता है। लेकिन यदि जन्म समय सही न हो, तो इसकी गणना प्रभावित हो सकती है।इसके विपरीत, नाड़ी ज्योतिष को एक रहस्यमय और प्राचीन पद्धति माना जाता है। इसकी जड़ें हजारों वर्ष पुरानी मानी जाती हैं और कहा जाता है कि ऋषि अगस्त्य, भृगु और वशिष्ठ जैसे महान ऋषियों ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति से लोगों के जीवन का विवरण ताड़पत्रों पर पहले ही लिख दिया था। इन पांडुलिपियों को नाड़ी पत्ते कहा जाता है।
नाड़ी ज्योतिष में व्यक्ति की पहचान उसके अंगूठे के निशान से की जाती है। पुरुषों के लिए दायां अंगूठा और महिलाओं के लिए बायां अंगूठा उपयोग में लिया जाता है। अंगूठे के निशान के आधार पर संबंधित पांडुलिपि खोजी जाती है। जब सही पत्ता मिल जाता है, तो उसमें व्यक्ति के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे नाम, माता-पिता, विवाह, संतान, करियर और जीवन की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख मिलता है। इस पद्धति में जन्म तिथि या समय की आवश्यकता नहीं होती।विशेषज्ञों के अनुसार नाड़ी ज्योतिष में 16 भावों का उपयोग किया जाता है, जबकि वैदिक ज्योतिष में 12 भावों के आधार पर गणना की जाती है। इस कारण नाड़ी ज्योतिष को अधिक व्यक्तिगत और विस्तृत माना जाता है।
नाड़ी ज्योतिष को रहस्यमय इसलिए माना जाता है क्योंकि इसकी पांडुलिपियां अत्यंत प्राचीन हैं और इनमें जीवन की घटनाओं का पहले से उल्लेख मिलता है। कई बार इन पत्तों में व्यक्ति के नाम और पारिवारिक विवरण तक सटीक पाए जाते हैं, जिससे लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं।आज के समय में भी देश के कई हिस्सों में लोग इस पद्धति में रुचि दिखा रहे हैं और इसे जानने के लिए विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं। वहीं वैदिक ज्योतिष अभी भी सबसे अधिक प्रचलित और वैज्ञानिक आधार पर विश्लेषित पद्धति मानी जाती है।





