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Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कल, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, प्रसाद और पूजा विधि

Sarita
15 Feb 2025 8:29 AM IST
Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2025:  द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कल, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, प्रसाद और पूजा विधि
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wijapriya Sankashti Chaturthi 2025: द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल 16 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन गणेशजी के द्विजप्रिय स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुहागिन महिलाएं संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए व्रत रखती है। धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने से साधक के सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं और साधक पर गणेशजी की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और पूजाविधि |
द्रिक पंचांग के अनुसार,फागुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को रात 11 बजकर 52 मिनट पर होगी और 17 फरवरी को सुबह 02 बजकर 15 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 16 फरवरी 2025 को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2025: शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त:05:16 ए एम से 06:07 ए एम तक
अभिजित मुहूर्त:12:13 पी एम से 12:58 पी एम तक
गोधूलि मुहूर्त:06:10 पी एम से 06:35 पी एम तक
अमृत काल :09:48 पी एम से 11:36 पी एम तक
विजय मुहूर्त :02:28 पी एम से 03:12 पी एम तक
पूजाविधि -
द्विजप्रिय संकष्टी के दिन सुबह जल्दी उठें।
स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
अब मंदिर की साफ-सफाई करें।
बासी फूलों को हटा दें।
एक छोटी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें।
गणेशजी की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।
अब गणेशजी को फल,फूल, दूर्वा, अक्षत,रोली, चंदन,धूप,दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
गणेशजी के मंत्रों का जाप करें। गणेश चालीसा का पाठ करें।
संभव हो, तो दिनभर व्रत रहें और रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।
भोग : द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेशजी को बूंदी के लड्डू , नारियल, दूध और ताजे फलों का भोग लगा सकते हैं।
1.ऊँ गं गणपतये नमः
2.ऊँ वक्रतुण्डाय हुं
3.ऊँ एकदंताय नमः
4.ऊँ लंबोदराय नमः
5.ऊँ विघ्ननाशाय नमः
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