धर्म-अध्यात्म

Dussehra 2025: दशहरे की ये दो कथाएं सिखाती हैं,बुराई पर होती है अच्छाई की जीत

Sarita
26 Sept 2025 12:49 PM IST
Dussehra 2025: दशहरे की ये दो कथाएं सिखाती हैं,बुराई पर होती है अच्छाई की जीत
x
Dussehra 2025: 22 सितंबर 2025 से इस साल शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुकी है और फिर दशमी तिथि पर दशहरा का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा. इस साल दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दशहरे पर मां दुर्गा की पूजा आराधना तो की ही जाती है, इसके साथ ही इस पर्व पर भगवान राम की पूजा करने का भी विधान है. दशहरे या विजयादशमी पर्व को बुराई पर अच्‍छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भक्त मनाते हैं. आश्वीन शुक्ल दशमी तिथि पर ही भगवान राम ने रावण का वध किया था. यही कारण है कि आश्विन शुक्‍ल दशमी पर दशहरा पर्व मनाया जाता है. वहीं दशहरा के दिन ही मां दुर्गा ने महिसाषुर का वध किया था. आइए दशहरे की इन दो रोचक और प्रेरक कथाओं को इस कड़ी में जानें|
श्रीराम से जुड़ी दशहरे की कथा:
बात त्रेतायुग की है जब 14 वर्ष के वनवास में निकले श्रीराम की पत्नी देवी सीता का अपहरण लंकापति रावण ने कर लिया. तब भगवान राम ने हनुमानजी से माता सीता का पता लगवाया. माता सीता को सम्मान पूर्वक श्रीराम को लौटाने और उनसे क्षमा मांगने का सुझाव रावण को कई लोगों ने दिया लेकिन रावण अपने कृत्य पर न तो पछताता था और न तो उसका अहंकार कम होता था. अंत में मर्यादा पुरुषोत्‍तम श्रीराम ने युद्धघोष कर दिया. युद्ध में जीत के लिए यानी बुराई के अंत के लिए भगवान श्रीराम ने आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक शक्ति की आराधान की और मां दुर्गा का आशीर्वाद लेकर आश्विन शुक्ल दशमी तिथि पर बुराई का प्रतीक बन चुके रावण का वध कर डाला. इस तरह अच्छाई की बुराई पर जीत हुई और इसे दशहरे या विजयादशमी के रूप में उत्सव की तरह मनाया जाने लगा|
महिसाषुर वध की कथा:
पौराणिक कथा है कि महिषासुर नाम के एक असुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि कोई पुरुष या पशु उसे मार न पाए. इस वरदान को पाने के बाद महिषासुर ने अपने आपको अमर समझ लिया क्योंकि उसे विश्वास था कि किसी स्त्री में इतनी शक्ति नहीं है कि उसका अंत कर सकें. महिषासुर ने तीनों लोकों में अत्याचार करना शुरू किया और देवताओं से स्वर्ग भी छीन लिया. परेशान होकर सभी देवता ब्रह्माजी, विष्णुजी और शिवजी से गुहार लगाने पहुंच गए ताकि महिषासुर से त्रिदेव उनकी रक्षा करें. तब शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का सृजन हुआ जिन्होंने महिषासुर से आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक यानी 9 दिन तक भयंकर युद्ध किया और दशमी तिथि पर महिषासुर का वध कर बुराई का अंत किया. मातारानी कृपा से स्वर्ग से लेकर धरती तक फिर से सब शांत और व्यवस्थित हो सका|
Next Story