धर्म-अध्यात्म

Durga Ashtami 2026: मासिक दुर्गा अष्टमी पर बस कर लें ये आसान काम,मां दुर्गा बरसाएंगी सुख-समृद्धि

Sarita
26 Jan 2026 11:50 AM IST
Durga Ashtami 2026: मासिक दुर्गा अष्टमी पर बस कर लें ये आसान काम,मां दुर्गा बरसाएंगी सुख-समृद्धि
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Durga Ashtami 2026: हिंदू धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है. पंचांग के अनुसारस, 26 जनवरी 2026 को माघ मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाएगी. खास बात ये है कि यह दिन माघ गुप्त नवरात्रि का आठवां दिन भी है, जो शक्ति की साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट, रोग और दोष मिट जाते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मासिक दुर्गा अष्टमी के लिए शुभ मुहूर्त क्या है, पूजन विधि और मंत्र आरती क्या है|
मासिक दुर्गाष्टमी 2026 डेट, शुभ मुहूर्त:
पंचांग की गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 जनवरी 2026 को रात 11 बजकर 10 मिनट से शुरू हो जाएगी. जबकि, इस तिथि की समाप्ति 26 जनवरी 2026 की रात 09 बजकर 17 मिनट पर होगी. ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, व्रत और पूजन 26 जनवरी को किया जाएगा|
दुर्गा पूजन का विशेष मुहूर्त:
अमृत योग- सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट तक. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से लेकर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा. जबकि, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा निशिता काल (मध्यरात्रि पूजा) रात 12 बजकर 07 मिनट से लेकर 01 बजे तक रहेगा. वहीं इस दिन राहु काल राहुकाल सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 9 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. ध्यान रहे कि राहुकाल में शुभ कार्य करना निषेध माना गया है|
इस बार दुर्गाष्टमी पर ग्रहों की स्थिति बहुत शुभ रहने वाली है. इस दिन साध्य और शुभ योग सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. इसके बाद शुभ योग की शुरू हो जाएगा. ये दोनों ही योग धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम माने गए हैं.अश्विनी नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. इसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू हो जाएगा|
दुर्गा अष्टमी पूजा विधि :
दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण करें क्योंकि लाल रंग मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है. इसके बाद पूजा घर को गंगाजल से शुद्ध करें. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. फिर, देवी को लाल चुनरी, अक्षत (चावल), लाल फूल और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. इसके बाद मां दुर्गा को फल और मिठाई का भोग लगाएं. इतना करने के बाद चरणामृत अर्पित करें. पूजन के अंत में घी का दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में मां की आरती करें. जो भक्त उपवास रखते हैं, वे शाम को पूजा के बाद गेहूं और गुड़ से बनी शुद्ध सात्विक चीजों का सेवन कर व्रत खोल सकते हैं|
मां दुर्गा के मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:
महागौरी ध्यान मंत्र:
सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
ध्यान मंत्र:
ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम
लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम
मां दुर्गा की आरती:
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री
जय अम्बे गौरी,...
मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको
जय अम्बे गौरी,...
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै
जय अम्बे गौरी,...
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी
जय अम्बे गौरी,...
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति
जय अम्बे गौरी,...
शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती
जय अम्बे गौरी,...
चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे
जय अम्बे गौरी,...
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी
जय अम्बे गौरी,...
चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता
जय अम्बे गौरी,...
भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी
जय अम्बे गौरी,...
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति
जय अम्बे गौरी,...
अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै
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