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धर्म-अध्यात्म
Phulera Dooj पर करें ये विशेष उपाय, जीवन में बना रहेगा प्रेम
Tara Tandi
28 Feb 2025 2:28 PM IST

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Phulera Dooj ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू धर्म में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं और सभी का अपना महत्व होता है लेकिन फुलेरा दूज को बेहद ही खास माना गया है जो कि राधा कृष्ण को समर्पित होता है। यह पर्व सभी के लिए खास महत्व रखता है खासकर मथुरा वृन्दावन में फुलेरा दूज का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
इस दिन ब्रजवासी खुशी और उत्साह के साथ फूलों की होली खेलते हैं। इस दिन सबसे पहले राधा कृष्ण पर फूल बरसाएं जाते हैं इसके बाद माखन मिश्री का भोग लगता है। फिर लोग एक दूसरे पर फूल बरसाते हैं। मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान कृष्ण ने फूलों वाली होली खेली थी।
इस साल फुलेरा दूज का पर्व 1 मार्च दिन शनिवार यानी कल मनाया जाएगा। इस दिन अगर राधा कृष्ण स्तोत्र का पाठ भक्ति भाव से किया जाए तो प्रभु की असीम कृपा बरसती है और जीवन में प्रेम सदा बना रहता है तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं श्री राधा कृष्ण अष्टकम् स्तोत्र।
राधा कृष्ण अष्टकम
चथुर मुखाधि संस्थुथं, समास्थ स्थ्वथोनुथं ।
हलौधधि सयुथं, नमामि रधिकधिपं ॥
भकाधि दैथ्य कालकं, सगोपगोपिपलकं ।
मनोहरसि थालकं, नमामि रधिकधिपं ॥
सुरेन्द्र गर्व बन्जनं, विरिञ्चि मोह बन्जनं ।
वृजङ्ग ननु रञ्जनं, नमामि रधिकधिपं ॥
मयूर पिञ्च मण्डनं, गजेन्द्र दण्ड गन्दनं ।
नृशंस कंस दण्डनं, नमामि रधिकधिपं ॥
प्रदथ विप्रदरकं, सुधमधम कारकं ।
सुरद्रुमपःअरकं, नमामि रधिकधिपं ॥
दानन्जय जयपाहं, महा चमूक्षयवाहं ।
इथमहव्यधपहम्, नमामि रधिकधिपं ॥
मुनीन्द्र सप करणं, यदुप्रजप हरिणं ।
धरभरवत्हरणं, नमामि रधिकधिपं ॥
सुवृक्ष मूल सयिनं, मृगारि मोक्षधयिनं ।
श्र्वकीयधमययिनम्, नमामि रधिकधिपं ॥
राधा कृष्ण स्तोत्र
वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम् ।
सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम् ॥
राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम् ।
राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम् ॥
राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम् ।
राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम् ॥
राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम् ।
राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम् ॥
ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम् ।
तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम् ॥
निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम् ।
नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम् ॥
यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम् ।
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ॥
बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम् ।
वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम् ॥
योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ।
गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम् ॥
हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम् ।
पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः ॥
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