धर्म-अध्यात्म

Diwali 2025: प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन क्यों होता है विशेष फलदायी,जानें पूजा का सही मुहूर्त

Sarita
19 Oct 2025 12:48 PM IST
Diwali 2025: दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक पर्व है। यह हिंदू धर्म के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। इस दिन घर-आंगन दीपों से जगमगाते हैं और मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और वैभव की कामना की जाती है। परिवारजन और मित्र एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर इस पर्व को हर्षोल्लास से मनाते हैं।
दिवाली पर पूजा का विशेष महत्व प्रदोष काल में होता है, क्योंकि यह समय देवी लक्ष्मी के आगमन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान की गई पूजा से घर में धन-धान्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सही समय पर की गई लक्ष्मी पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का महत्व:
प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व इसलिए माना गया है क्योंकि यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली और शुभफलदायी होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्यास्त के बाद का लगभग दो घंटे का समय प्रदोष काल कहलाता है, जो दिन और रात के मिलन का संधिकाल होता है। इस समय ब्रह्मांड में सात्विक और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह अपने उच्चतम स्तर पर होता है, जिससे की गई पूजा अत्यधिक प्रभावशाली और फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से दीपावली के दिन यह काल और भी शुभ हो जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी समय मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं और उन घरों में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, दीपों की रौशनी, भक्ति और श्रद्धा से युक्त वातावरण होता है। जो व्यक्ति प्रदोष काल में विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन करता है, उसके घर में मां लक्ष्मी की कृपा से स्थायी रूप से धन, सुख और समृद्धि का वास होता है। अतः यह काल केवल पूजा का नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने और जीवन में सौभाग्य को आमंत्रित करने का सर्वोत्तम अवसर माना गया है।
प्रदोष काल का महत्व:
दिवाली की रात प्रदोष काल का विशेष महत्व है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इसी समय देवी महालक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं। यह वह पावन क्षण होता है जब मां लक्ष्मी भक्तों के घरों में प्रवेश करती हैं और उन्हें धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन और दीपदान प्रदोष काल में ही करना चाहिए, क्योंकि इसी समय देवी की कृपा सबसे अधिक सक्रिय होती है। इस वर्ष अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर को दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे तक रहेगी। चूंकि 20 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल और निशीथ काल, दोनों में उपस्थित है, इसलिए लक्ष्मी पूजन के लिए यही दिन सर्वोत्तम है। इस दिन सही मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजन करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में स्थायी रूप से सुख-समृद्धि का वास होता है।
दिवाली 2025 लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त:
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए सही समय का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी से पूजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में दिवाली 20 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए कई शुभ समय उपलब्ध होंगे, लेकिन प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।
इस दिन प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से लेकर 8:18 बजे तक रहेगा। इस काल के भीतर पूजन करने से मां लक्ष्मी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। वहीं, लक्ष्मी पूजन का महा-शुभ मुहूर्त विशेष रूप से शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक रहेगा। यही समय सबसे अनुकूल और शुभ माना जा रहा है, जब श्रद्धा और विधिपूर्वक की गई पूजा से घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।
लक्ष्मी पूजन का लाभ:
लक्ष्मी पूजन दीपावली के सबसे प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है, जो केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती और आर्थिक स्थिति में निरंतर सुधार होता है।
इस दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है, जो बुद्धि, विवेक और शुभता के देवता हैं। लक्ष्मी और गणेश की संयुक्त आराधना से न केवल धन प्राप्त होता है, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता, शांति और संतुलन भी जीवन में आता है, जिससे घर में सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है।
व्यापारी वर्ग के लिए दिवाली विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। इस दिन वे अपने नए खाता-बही (लेजर) की पूजा करते हैं और व्यापार में उन्नति की प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा नए आर्थिक वर्ष की शुरुआत के रूप में देखी जाती है।
इसके अलावा, अमावस्या की अंधेरी रात में दीप जलाकर की गई लक्ष्मी पूजा जीवन से नकारात्मकता और अज्ञान के अंधकार को दूर करती है। यह पवित्र अनुष्ठान न केवल भौतिक सुख देता है, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता और मानसिक सुकून भी प्रदान करता है। इस प्रकार लक्ष्मी पूजन जीवन के हर पहलू में शुभता और समृद्धि लाने का माध्यम है।
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