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धर्म-अध्यात्म
Dhanteras 2025: इन अनुष्ठानों और मंत्रों के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करें, सभी रोगों से मिलेगी मुक्ति
Sarita
16 Oct 2025 10:04 AM IST

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Dhanteras 2025: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है, जिसे धन, समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक पर्व माना जाता है। इस दिन से पांच दिवसीय दिवाली उत्सव की शुरूआत होती है। इस वर्ष धनतेरस 18 अक्तूबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इन तीनों देवताओं की आराधना से न केवल धन-संपदा की वृद्धि होती है, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का भी आशीर्वाद मिलता है।
स्वास्थ्य के देवता हैं भगवान धन्वंतरि :
धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और औषधियों के साथ प्रकट हुए थे। इसीलिए उन्हें आयुर्वेद के जनक और आरोग्य के देवता कहा जाता है। धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा का महत्व केवल सोना-चांदी या वस्तुएं खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य ही सच्चा धन है। एक स्वस्थ शरीर ही व्यक्ति को परिश्रम, कमाई और सुखपूर्वक जीवन जीने में सक्षम बनाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना से रोगों से मुक्ति, दीर्घायु और सुदृढ़ स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
धनतेरस पूजा विधि:
प्रदोष काल को भगवान धन्वंतरि की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
पूजा स्थान पर लाल या पीले वस्त्र का आसन बिछाकर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीपक जलाने से पहले नीचे चावल या नया धान रखें।
तांबे के कलश में जल भरकर उसे पूजा स्थल पर रखें और उसी जल से सभी देवी-देवताओं को आचमन कराएं।
भगवान धन्वंतरि सहित लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देव की भी पूजा करें।
पूजा के दौरान रोली, हल्दी, चावल, पुष्प, पान, श्रीफल और नैवेद्य अर्पित करें।
भगवान धन्वंतरि से परिवार की आरोग्यता और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करें।
पूजा के समय निम्न मंत्र जाप करें।
धन्वंतरि मंत्र:
ॐ धन्वंतराये नमः।
इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और ऊर्जा प्राप्त होती है।
आरोग्य प्रदान करने वाला शक्तिशाली मंत्र
ॐ नमो भगवते महासुर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरायेः
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय।
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषणचक्र नारायणाय नमः।।
पवित्र धन्वंतरि स्तोत्र:
ॐ शङ्खं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमम्भोजनेत्रम ।
कालाम्भोदोज्ज्वलाङ्गं कटितटविलसच्चारूपीताम्बराढ्यम
वन्दे धन्वन्तरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम ॥1॥
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरायेः
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय्
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्रीधनवन्तरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः ॥ २॥
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