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धर्म-अध्यात्म
Dhanteras 2025: क्यों मनाया जाता है धनतेरस ,जानिए पौराणिक कथा, महत्व और मान्यताएं
Sarita
18 Oct 2025 9:59 AM IST

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Dhanteras 2025: सनातन धर्म में दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। यह दिन न केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति का प्रतीक है, बल्कि आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि जीवन का संदेश भी देता है। शास्त्रों में इसे धनत्रयोदशी कहा गया है क्योंकि यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अंशावतार और देवताओं के वैद्य भगवान धन्वन्तरि के प्राकट्य का पर्व मनाया जाता है।
धनतेरस का धार्मिक महत्व:
धनतेरस के दिन विधि-विधान से देवी-देवताओं की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। भगवान धन्वन्तरि को आयुर्वेद का जनक माना गया है, और इस दिन उनकी उपासना करने से आरोग्य, निरोगता और मानसिक संतुलन की प्राप्ति होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है। संध्या समय प्रदोषकाल में घर के बाहर दीप जलाने से यम का भय दूर होता है और जीवन में दीर्घायु का वरदान प्राप्त होता है।
समुद्र मंथन से हुआ भगवान धन्वन्तरि का प्राकट्य:
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र के अहंकारवश महर्षि दुर्वासा ने उन्हें श्राप दे दिया कि तीनों लोक श्रीहीन हो जाएंगे। परिणामस्वरूप समस्त देवता दुर्बल हो गए और लक्ष्मी जी अपने लोक लौट गईं। इस संकट से मुक्ति पाने हेतु देवता त्रिदेवों के पास पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें समुद्र मंथन करने की सलाह दी।
मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी बनाकर देवता और दैत्य दोनों ने समुद्र मंथन आरंभ किया। इस मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई। इनमें चौदहवें रत्न के रूप में भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए, जो अपने करकमलों में अमृतकलश लिए हुए थे। भगवान विष्णु ने उन्हें देवताओं का वैद्य नियुक्त किया। उन्होंने औषधियों की शक्ति को जागृत किया, जिससे समस्त वनस्पतियों में रोगनाशक तत्वों का प्रादुर्भाव हुआ।
धनतेरस से जुड़ी दिव्य घटनाएं:
शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के क्रम में शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को भगवान धन्वन्तरि और अमावस्या को देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं। इसीलिए कार्तिक त्रयोदशी का यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वन्तरि की पूजा के साथ दीपदान और आरोग्य की कामना की जाती है।
धन्वन्तरि से आयुर्वेद की परंपरा:
भगवान धन्वन्तरि ने मानव कल्याण के लिए अमृतमय औषधियों की खोज की। इन्हीं के वंश में राजा दिवोदास हुए जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक कहा गया। उनके शिष्य महर्षि सुश्रुत ने “सुश्रुत संहिता” जैसे महान आयुर्वेद ग्रंथ की रचना की, जिसमें चिकित्सा विज्ञान का विस्तृत वर्णन है। यही कारण है कि धनतेरस को आयुर्वेद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
धनतेरस का पूजन और मान्यता:
इस दिन प्रदोषकाल में दीपदान करना, भगवान धन्वन्तरि, कुबेर और लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। लोग इस दिन सोना, चांदी, तांबा, या पीतल के बर्तन खरीदते हैं, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक हैं। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि धन के साथ स्वास्थ्य भी ईश्वर का अमूल्य वरदान है, और दोनों का संतुलन ही जीवन का सच्चा धन है।
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