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धर्म-अध्यात्म
Devshayani Ekadashi 2025: देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को अर्पित करें ये चीजें, पूरी होगी हर मनोकामना
Sarita
30 Jun 2025 4:40 PM IST

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Devshayani Ekadashi 2025: देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है, जिसे आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर रखा जाता है। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा में चले जाते हैं। चूंकि श्रीहरि योग निद्रा में होते हैं, इसलिए शादी-विवाह, मुंडन, कुआं पूजन सहित अन्य शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
हिंदू धर्म में इस चार माह के समय को चातुर्मास कहते हैं। खास बात यह है कि चातुर्मास में सृष्टि का संचालन काल के काल महाकाल करते हैं, इसलिए भजन-कीर्तन व पूजा-पाठ जैसे शुभ कार्य करने पर जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं।
इस साल 6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि और समस्त पापों का नाश होता है। यही नहीं साधक को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दौरान विष्णु जी को कुछ खास चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी कृपा बरसाते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:08 मिनट से 04:48 मिनट तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 2:45 मिनट से 03:40 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:01 से 12:49 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त-रात 12:06 मिनट से 12:46 मिनट तक।
अमृतकाल- दोपहर 12:51-2:38 मिनट तक।
इस दिन विशाखा नक्षत्र बन रहा है , जो रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा रात 9: 26 मिनट तक साध्य योग का संयोग रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को केसर की मिठाई का भोग लगाएं। आप केसर की खीर बनाकर भी प्रभु को भोग लगा सकती हैं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु को काले तिल के लड्डू का भोग जरूर लगाएं। इससे तनाव, कर्ज, रोग समेत अन्य परेशानियां दूर होंगी।
देवशयनी एकादशी के दिन प्रभु को पंजीरी का भोग लगा सकते हैं। इसे धनिया और सूखे मेवों से तैयार किया जाता है, जो सात्विक और स्वादिष्ट दोनों होती हैं। इससे व्यक्ति सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती हैं।
देवशयनी एकादशी पर विष्णु जी की पूजा करें। इसके बाद उन्हें पंचामृत जिसे दूध, दही, शहद, चीनी और घी के मिश्रण से तैयार किया जाता है इसका भोग लगाएं। इससे श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती हैं। इसके अलावा आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
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