धर्म-अध्यात्म

Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी पर क्या खाएं और क्या नहीं? जानें व्रत के सभी नियम

Sarita
1 Nov 2025 8:47 AM IST
Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी पर क्या खाएं और क्या नहीं? जानें व्रत के सभी नियम
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Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है। यह एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इस एकादशी पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं। भगवान के जागने के साथ ही चातुर्मास (चार महीने की अवधि) समाप्त हो जाता है। इसके बाद, विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं जो भगवान की योग निद्रा के बाद पहले बंद हो गए थे।
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। देवउठनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी और कठोर माना जाता है। व्रत के दौरान खान-पान में अत्यधिक सावधानी बरती जाती है। तो आइए जानें कि इस व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं। साथ ही, व्रत के सभी नियम भी जानें।
देवउठनी एकादशी कब है?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर, यानी कल सुबह 9:11 बजे शुरू हो रही है। यह तिथि 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे समाप्त होगी। अतः सूर्योदय के अनुसार, देवउठनी एकादशी व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा।
देवउठनी एकादशी व्रत में क्या खाएं?
देवउठनी एकादशी के दिन सभी प्रकार के फल और मेवे खाने चाहिए। आलू, शकरकंद, अरबी और साबूदाना खाना चाहिए। सिंघाड़े के आटे, कुट्टू के आटे और राजगिरे के आटे से बनी पूरी, पराठे या पकौड़े खाने चाहिए। दूध, दही, छाछ, पनीर और घी का सेवन करना चाहिए। केवल सेंधा नमक और सात्विक मसाले जैसे काली मिर्च, हरी मिर्च, अदरक और जीरा पाउडर का ही प्रयोग करना चाहिए।
देवउठनी एकादशी व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
देवउठनी एकादशी के व्रत में गेहूँ, जौ, बाजरा, मक्का और सभी प्रकार की दालों का सेवन नहीं करना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मछली और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। साधारण नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। पत्तागोभी, गाजर, पालक, बैंगन और शलजम जैसी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
देवउठनी एकादशी के दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए। किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए। झूठ नहीं बोलना चाहिए। किसी से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। सोना नहीं चाहिए। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। व्रत के प्रसाद में चावल और मांसाहारी खाद्य पदार्थ शामिल नहीं करने चाहिए।
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